क्या कभी ऐसा लगा कि मन में उलझन है और किसी को बताने से डर लग रहा है? यही वो जगह है जहाँ काउंसलिंग काम आती है। आसान शब्दों में, काउंसलिंग एक बातचीत है जिसमें आप अपनी बात खुल कर कहते हैं और प्रोफेशनल मदद ले सकते हैं। इसमें कोई जजमेंट नहीं होता, सिर्फ़ सुनना‑समझना और सही दिशा दिखाना रहता है।
1. व्यक्तिगत काउंसलिंग – जब आप अकेले या एक-एक करके बात करते हैं, तो आपका पूरा फोकस आपके मुद्दों पर रहता है। यह डिप्रेशन, एंग्जायटी या रिलेशनशिप प्रॉब्लम्स के लिए बढ़िया विकल्प है। 2. जुड़वां/परिवार काउंसलिंग – जब समस्या दो या अधिक लोगों में फैलती है, तब पूरे परिवार को साथ लाकर बात की जाती है। इससे एक-दूसरे की समझ बढ़ती है और टकराव कम होते हैं। 3. ग्रुप काउंसलिंग – समान समस्याओं वाले लोग मिलकर चर्चा करते हैं। यहाँ आप दूसरों के अनुभव से सीखते हैं, साथ ही खुद को अकेला महसूस नहीं करते। 4. ऑनलाइन काउंसलिंग – मोबाइल या कंप्यूटर पर वीडियो कॉल के ज़रिए सत्र होते हैं। व्यस्त लोग और दूर रहने वाले इसे पसंद करते हैं क्योंकि यह सुविधाजनक है।
हर प्रकार का अपना फायदा होता है, इसलिए पहले सोचें कि आपको कौन‑सा तरीका सबसे सही लगता है।
काउंसलिंग शुरू करने से पहले एक भरोसेमंद काउंसलर मिलना बहुत ज़रूरी है। यहाँ कुछ आसान टिप्स हैं:
एक बार सही काउंसलर मिल जाए, तो सत्र में पूरी ईमानदारी से बात करें। आपका खुला मन ही सबसे बड़ा इलाज है। छोटे‑छोटे लक्ष्य रखें, जैसे रोज़ 5 मिनट अपने फीलिंग्स लिखना या सप्ताह में एक बार सत्र लेना। धीरे‑धीरे आप खुद को बेहतर समझ पाएँगे और समस्याओं का हल भी निकलेगा।
काउंसलिंग सिर्फ़ दिमागी रोगों के लिए नहीं, बल्कि जीवन की रोज़मर्रा की चुनौतियों से निपटने के लिए भी है। चाहे काम‑के तनाव हों या रिश्ते‑में झगड़े, एक प्रोफेशनल साथी आपको सही दिशा दिखा सकता है। तो देर किस बात की? आज ही अपनी ज़रूरतों को पहचानें और काउंसलिंग शुरू करें।
अगस्त 15, 2024
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) आज से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) अंडरग्रेजुएट काउंसलिंग 2024 शुरू कर रही है। पहला राउंड 14 अगस्त से 20 अगस्त तक चलेगा। उम्मीदवारों को mcc.nic.in पर जाकर पंजीकरण करना होगा। संस्थानों में रिपोर्टिंग 24 से 29 अगस्त के बीच करनी होगी।
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