मंकीपॉक्स – क्या है, क्यों फैलता है और क्या करें?

अभी कई लोग मंकि‍पीक्स शब्द सुनते हैं, लेकिन असली में यह बीमारी कितनी खतरनाक है, किसे होती है और हम इसे कैसे रोक सकते हैं, अक्सर स्पष्ट नहीं रहता। चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि ये वायरस क्या करता है और आप रोज़मर्रा की जिंदगी में कौन‑सी छोटी‑छोटी चीज़ें बदलकर खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

मुख्य लक्षण

मंकि‍पीक्स के शुरुआती संकेत अक्सर साधारण बुखार, सिरदर्द और थकान होते हैं। 1‑3 दिन बाद त्वचा पर छोटे‑छोटे दाने निकलते हैं जो पहले चेहरे या मुंह से शुरू होकर शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकते हैं। ये दाने कभी‑कभी दर्दनाक भी हो सकते हैं और कुछ दिनों में ही भर जाते हैं, लेकिन अगर तुरंत इलाज न किया गया तो संक्रमण गहरा हो सकता है। खास बात यह है कि लक्षण अक्सर 2‑4 हफ्ते तक रह सकते हैं, इसलिए डॉक्टर से जांच करवाना ज़रूरी है।

रोकथाम के आसान उपाय

सबसे असरदार बचाव व्यक्तिगत स्वच्छता में है। सार्वजनिक स्थानों पर हाथ धोना, सैनीटाइज़र का प्रयोग और संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचना मुख्य कदम हैं। अगर आपको किसी ऐसे इलाके की यात्रा करनी पड़े जहाँ मंकि‍पीक्स केस रिपोर्ट हुए हों, तो मास्क पहनें और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में ज्यादा समय न बिताएँ। घर में अगर कोई मरीज है तो कमरे को अच्छी तरह हवादार रखें, बिस्तर और टॉवल जैसे कपड़े अलग‑अलग इस्तेमाल करें।

टिकाकरण की बात करें तो अभी कई देशों ने छोटेpox के वैक्सीन को मंकि‍पीक्स से बचाव के लिए प्रयोग किया है। भारत में भी स्वास्थ्य विभाग आवश्यकतानुसार यह वैक्सीनेशन प्रदान करता है, लेकिन आम जनता के लिये अभी व्यापक उपलब्धता नहीं है। इसलिए प्राथमिक रोकथाम पर ध्यान देना ज़्यादा फायदेमंद रहता है।

यदि आपको या आपके किसी परिचित को ऊपर बताए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाएँ। डॉक्टर अक्सर एंटीवायरल दवाइयों से उपचार शुरू करते हैं और रोगी की हालत के अनुसार सपोर्टिव देखभाल देते हैं। इलाज देर से शुरू होने पर जटिलताएं जैसे बैक्टीरियल इन्फेक्शन या त्वचा का घाव बढ़ना संभव है, इसलिए जल्दी कदम उठाना जरूरी है।

आखिर में यह समझना महत्वपूर्ण है कि मंकि‍पीक्स बहुत ही दुर्लभ और नियंत्रित होने योग्य वायरस है, जब तक हम स्वच्छता के बुनियादी नियमों को अपनाते रहें। समाचार में अक्सर केस बढ़ते दिखते हैं, लेकिन सही जानकारी और समय पर कदम उठाने से आप इस बीमारी को अपने और परिवार के लिए खतरा नहीं बनने देते। याद रखें – साफ‑सफ़ाई और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रयोग ही सबसे बड़ा बचाव है।

भारत में पहला संदिग्ध मंकीपॉक्स मामला, मरीज आइसोलेशन में
Ranjit Sapre

भारत में पहला संदिग्ध मंकीपॉक्स मामला, मरीज आइसोलेशन में

स्वास्थ्य 0 टिप्पणि
भारत में पहला संदिग्ध मंकीपॉक्स मामला, मरीज आइसोलेशन में

भारत में पहला संदिग्ध मंकीपॉक्स मामला सामने आया है। मरीज हाल ही में एक अन्य देश से लौटा है जहाँ मंकीपॉक्स के मामले पाए जा रहे हैं। मरीज को अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया है और उसकी स्थिति स्थिर है। मरीज के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।

और पढ़ें