न्यूक्लेअर पावर क्या है और क्यों ज़रूरी है?

परमाणु ऊर्जा यानी न्यूक्लेअर पावर वो बिजली है जो अणुओं को तोड़ने या मिलाने से निकलती है। जब यूरेनियम के एटॉमिक नाभिक फूटते हैं, तो बहुत सारी गर्मी पैदा होती है और उसे टरबाइन चलाकर बिजली बनाते हैं। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड कम निकलता है, इसलिए इसे साफ ऊर्जा माना जाता है।

भारत में न्यूक्लेअर ऊर्जा का वर्तमान परिदृश्य

आज भारत के 22 कार्यरत एटॉमिक रिएक्टर हैं और कई नई साइट्स की योजना बनाई गई है। यह कुल बिजली उत्पादन का लगभग 3-4% भाग बनाते हैं, लेकिन भविष्य में इस प्रतिशत को दोगुना या तिगुना करने का लक्ष्य है। सरकार ने "अटल ऊर्जा मिशन" के तहत 2030 तक 63,000 मेगावॉट की न्यूक्लेअर क्षमता जोड़ने की घोषणा की थी।

किरणशक्ति वाले क्षेत्रों में कई स्टेट-ओन्ड प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जैसे कर्नाटक का कुदरि रिएक्टर और तमिलनाडु का कोडियम‑आधारित रिएक्टर। इन प्रोजेक्ट्स से न केवल बिजली बल्कि चिकित्सा और कृषि में भी उपयोगी आयोनीज़र बनते हैं।

भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां

न्यूक्लेअर पावर के बड़े फायदे हैं – लगातार, भरोसेमंद और कम कार्बन वाला उत्पादन। अगर सही ढंग से प्रबंधित किया जाए तो यह भारत को ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाने में मदद कर सकता है। साथ ही, एटॉमिक तकनीक का उपयोग पानी की कमी वाले क्षेत्रों में समुद्री जल शोधन के लिए भी हो रहा है।

पर चुनौतियां भी हैं। सुरक्षा को लेकर जनता में अभी भरोसा नहीं बना है, इसलिए हर नई इकाई को कड़े मानकों पर चलना पड़ता है। साथ ही रैडियोधर्मी कचरा संभालना एक लंबा मुद्दा है; इसे सुरक्षित ढंग से संग्रहित करना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जोखिम कम रखना आवश्यक है।

फंडिंग भी बड़ी बाधा हो सकती है, क्योंकि हर मेगावॉट सेट अप करने में कई बिलियन रुपये लगते हैं। इसलिए प्राइवेट सेक्टर को आकर्षित करने के लिए लोन, टैक्स रिवॉर्ड और सार्वजनिक‑निजी भागीदारी (PPP) मॉडल अपनाया जा रहा है।

अगर ये सारी बातें सही से लागू हों तो न्यूक्लेअर पावर भारत की ऊर्जा मिश्रण में एक स्थिर आधार बन सकती है। हमें अभी से ही जागरूकता फैलानी होगी, ताकि नई पीढ़ी इस तकनीक को समझे और आगे बढ़ाए। यही तरीका है स्वच्छ, सस्ती और भरोसेमंद बिजली के भविष्य का।

फ्रांस की ऊर्जा संकट: न्यूक्लेअर पावर और हीटवेव्स के बीच प्रभावित बिजली आपूर्ति
Ranjit Sapre

फ्रांस की ऊर्जा संकट: न्यूक्लेअर पावर और हीटवेव्स के बीच प्रभावित बिजली आपूर्ति

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फ्रांस की ऊर्जा संकट: न्यूक्लेअर पावर और हीटवेव्स के बीच प्रभावित बिजली आपूर्ति

फ्रांस में न्यूक्लेअर पावर की निर्भरता और कई रिएक्टरों के मेंटेनेंस के कारण ऊर्जा संकट गहरा गया है। हीटवेव्स ने बिजली की खपत को बढ़ा दिया है और ऊर्जा नियामक ने चेतावनी जारी की है। इस संकट ने फ्रांस की ऊर्जा अवसंरचना की कमजोरी को उजागर किया है और ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की आवश्यकता पर बल दिया है।

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