जब कार खुद ही साइड से लेन बदलती या ब्रेक लगाती दिखे, वही ऑटोपायलट कहलाता है। यह सिस्टम सेंसर, कैमरा और एआई का इस्तेमाल करके ड्राइवर को मदद करता है, लेकिन पूरी तरह से इंसान की जगह नहीं लेता। अगर आप पहली बार सुन रहे हैं तो सोचिए जैसे GPS बताता है रूट, वैसे ही कार भी खुद चलने की कोशिश करती है।
बाजार में दो बड़े वर्ग होते हैं – अडैप्टिव क्रूज़ कंट्रोल (ACC) और लेन‑कीपिंग असिस्ट (LKA)। ACC दूरी बनाकर रखता है, जबकि LKA कार को लेन में ही रखता है। कुछ हाईएंड मॉडल इन दोनों को मिलाकर ‘फुल सेल्फ ड्राइविंग’ जैसा अनुभव देते हैं, पर अभी भी हाँडओवर बटन ज़रूरी रहता है।
इंडिया में अब टेस्ला नहीं, कई भारतीय ब्रांड्स जैसे मारुति और टाटा भी बेसिक ऑटो पायलट फीचर जोड़ रहे हैं। सरकारी नियम अभी भी सख़्त है – हर 30 सेकेंड पर ड्राइवर को हाथ रखना पड़ता है। लेकिन बड़े शहरों की ट्रैफिक में यह फिचर काफी काम का साबित हो रहा है, खासकर हाईवे पर लंबे सफ़र में थकान घटाने के लिए।
ऑटोपायलट इस्तेमाल करने से पहले कुछ बातें ध्यान में रखें: स्टीयरिंग व्हील पर हमेशा हाथ रखें, कैमरा और सेंसर साफ रखें, और मौसम की स्थिति (बारिश या धुंध) को समझें। अगर सिस्टम अलर्ट दे तो तुरंत मैन्युअल मोड पर आएँ। ये छोटे‑छोटे कदम दुर्घटनाओं से बचा सकते हैं।
काफी लोग सोचते हैं कि ऑटोपायलट पूरी तरह स्वतंत्र होगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं है। एआई बहुत तेज़ है, फिर भी अनपेक्षित रोड कंडीशन या अचानक रुकावटों में इंसान की जल्दी‑रात कार्रवाई जरूरी रहती है। इसलिए इसे एक ‘सहायक’ मानें, न कि पूर्ण चालक।
भविष्य में 2025 तक भारत में 40% नई कारों में लेवल 3 ऑटोपायलट फीचर आने की उम्मीद है। इससे लॉन्ग ड्राइव आरामदायक होगा और ट्रैफिक जाम कम हो सकता है, क्योंकि सिस्टम कई कारें एक साथ नियंत्रित कर पाएगा। परन्तु इस तकनीक के साथ साइबर‑सुरक्षा का सवाल भी बड़ा रहेगा।
अगर आप नई कार खरीदने की सोच रहे हैं तो स्पेसिफ़िकेशन शीट में ‘ऑटोपायलट’, ‘एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस’ या ‘ADAS’ देखिए। ये शब्द बताते हैं कि कार किस हद तक खुद चल सकती है। डीलर से टेस्ट‑ड्राइव करवाएँ और वास्तविक प्रदर्शन पर ध्यान दें, सिर्फ विज्ञापन नहीं।
संक्षेप में, ऑटोपायलट एक सहायक टूल है जो ड्राइविंग को आसान बनाता है, लेकिन अभी भी सुरक्षित रहने के लिए खुद की सतर्कता ज़रूरी है। सही जानकारी और सावधानी से आप इस तकनीक का पूरा फ़ायदा उठा सकते हैं।
जून 10, 2024
टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने भारतवंशी इंजीनियर अशोक एलुस्वामी की प्रशंसा की है, जिनके महत्वपूर्ण योगदान ने टेस्ला की AI और ऑटोपायलट सॉफ्टवेयर में सफलता में प्रमुख भूमिका निभाई है। एलुस्वामी टेस्ला के ऑटोपायलट टीम के पहले सदस्य थे और अब वह पूरे AI और ऑटोपायलट सॉफ्टवेयर का नेतृत्व करते हैं।
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