अशोक एलुस्वामी: एक परिचय
अशोक एलुस्वामी, जिन्हें हाल ही में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने कंपनी की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ऑटोपायलट सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सराहा है, आज चर्चाओं में हैं। अशोक एलुस्वामी एक भारत-वंशी रोबोटिक्स इंजीनियर हैं और उनकी इंजीनियरिंग यात्रा ने उन्हें टेस्ला तक पहुंचाया। टेस्ला के ऑटोपायलट टीम के पहले सदस्य होने का खिताब रखते हुए, उन्होंने एक महत्वपूर्ण पहचान बनाई है।
कर्मठता और प्रचार का संगम
एलन मस्क ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पर विशेष रूप से आगाह किया कि अशोक एलुस्वामी और उनकी टीम के बिना टेस्ला एक साधारण कार निर्माता होती, जो किसी भी अन्य स्वायत्तता प्रदाता की तलाश में होती। एलुस्वामी के लिए यह प्रशंसा केवल प्रशंसा से कहीं अधिक है; यह उनकी मेहनत और ईमानदारी का प्रमाण है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
अशोक एलुस्वामी का जन्म और परवरिश भारत के चेन्नई में हुई थी। उन्होंने वहां के प्रतिष्ठित कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गुंडी से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की प्रसिद्ध कार्नेगी मेलोन यूनिवर्सिटी से रोबोटिक्स सिस्टम डेवलपमेंट में उच्च शिक्षा हासिल की।
प्रोफेशनल यात्रा
टेस्ला में शामिल होने से पहले, एलुस्वामी ने WABCO Vehicle Control Systems और Volkswagen जैसे जानी-मानी कंपनियों के साथ काम किया। उनके पास कम्प्यूटर विजन और पर्सेप्शन, प्लानिंग और कंट्रोल में गहरा ज्ञान है।
टेस्ला के साथ यात्रा
जब एलन मस्क ने ऑटोपायलट टीम के लिए उम्मीदवारों की तलाश में एक ट्वीट किया, तब एलुस्वामी की यात्रा टेस्ला के साथ शुरू हुई। मस्क की महत्वाकांक्षा और टेस्ला की विजन ने उन्हें अति उन्नत और नवाचारी विचारों को स्वीकार करने का अवसर दिया। एलुस्वामी ने 2021 में ऑटोपायल ट टीम के पहले सदस्य के रूप में इस चुनौती को स्वीकार किया और अब वह पूरे AI और ऑटोपायलट सॉफ्टवेयर का नेतृत्व करते हैं।
एलुस्वामी की प्रतिभा और योगदान
एलुस्वामी के महत्त्वपूर्ण प्रशंसा का मुख्य कारण उनकी समझ और एविस्पार्क की महारत है, जो टेस्ला को ऑटोनोमी के क्षेत्र में बाजार अग्रणी बनाती है। उनकी तकनीकी विशेषज्ञता, शैली, और टीम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने टेस्ला को रोबोटिक्स और AI के क्षेत्र में उच्च स्थान पर खड़ा किया है।
एलन मस्क की प्रतिक्रिया
मस्क ने अशोक एलुस्वामी को व्यक्तिगत रूप से सोशल मीडिया पर धन्यवाद दिया और उनकी टीम की कड़ी मेहनत की सराहना की। मस्क ने कहा कि टेस्ला की सफलता का प्रमुख सहारा एलुस्वामी जैसे कर्तव्यनिष्ठ इंजीनियर हैं, जो मेहनत, तकनीक की गहरी समझ और समर्पण के साथ कार्य करते हैं।
भविष्य की राह
अशोक एलुस्वामी के लिए यह सराहना एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उनके लिए यह दिखाने का मौका है कि कैसे एक भारतीय उत्पत्ति के इंजीनियर तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में नवीन उद्यम कर सकते हैं। उनके योगदान से प्रभावित होकर, कई युवा इंजीनियरों के लिए भी यह प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
अशोक एलुस्वामी का समर्पण और टेस्ला के लिए उनका दृष्टिकोण न केवल उनकी बल्कि पूरी टीम की सफलता का कारण है। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा है जो कुछ बड़ा हासिल करने का सपना देखते हैं।
Rajshree Bhalekar
जून 10, 2024 AT 18:39इतनी बड़ी उपलब्धि देखकर मेरा दिल गर्व से धड़क रहा है।
Ganesh kumar Pramanik
जून 10, 2024 AT 20:19एशोक की कहानी सुनके लगा जैसे सपने सच हुए हैं
टेस्ला में भारतीय इंजीनियर होना कोई छोटी बात नहीं
पर मस्क की तारीफों में थोड़़ी झलक है अपने योगदान की
हर बॉस को अपनी टीम पे गर्व होना चाहिए
Abhishek maurya
जून 10, 2024 AT 21:59अशोक एलुस्वामी का सफर शुरुआती दिनों में ही चुनौतीपूर्ण रहा।
चेन्नई की गलियों से लेकर सिलिकॉन वैली तक उनका रास्ता कई बाधाओं से भरा था।
उनका इलेक्ट्रॉनिक्स में बेस्ट रैंकिंग ने ही उन्हें शुरुआती शोध में प्रेरणा दी।
कार्नेगी मेलोन में रोबोटिक्स का अध्ययन करने से उन्होंने गणितीय मॉडलिंग में महारत हासिल की।
औद्योगिक कंपनियों में काम करते हुए उन्होंने वास्तविक दुनिया की समस्याओं को समझा।
WABCO और Volkswagen में उनके प्रोजेक्ट्स ने ऑटोनॉमी की बुनियादी तकनीक को परिष्कृत किया।
टेस्ला में उनका चयन एलन मस्क के टिविट्टर पोस्ट के बाद हुआ, जो कई वर्षों की तैयारी का परिणाम था।
ऑटोपायलट टीम के पहले सदस्य के रूप में उन्होंने सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर को पुनः डिज़ाइन किया।
उनकी टीम ने कंप्यूटर विज़न एल्गोरिद्म को इस तरह सुधारा कि रात में भी सड़कों को पहचान सकें।
प्लानिंग मोड्यूल में उन्होंने रीयल-टाइम डिसीजन मैकेनिज़्म जोड़कर प्रतिक्रिया समय को घटाया।
कंट्रोल सिस्टम में उन्होंने फीडबैक लूप को स्थिर बनाया जिससे वाहन की सुरक्षा बढ़ी।
एलुस्वामी की नेतृत्व शैली में सहयोगी भावना और तेज़ निर्णय क्षमता प्रमुख थे।
उनके योगदान से टेस्ला का ऑटोपायलट अब कई शहरों में पूरी तरह से स्वायत्त मोड में चलता है।
इस उपलब्धि ने भारतीय इंजीनियरों को नई आशा दी कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ में जगह बन सकती है।
अंत में कहा जा सकता है कि उनकी कहानी विज्ञान और मेहनत के संगम का जीवंत उदाहरण है।
Sri Prasanna
जून 10, 2024 AT 23:39स्टार टाइटल के पीछे बहुत सारी मेहनत होती है कोई सांस नहीं लेता बस काम चलता रहता है अफसोस कुछ लोग शून्य ही देखते हैं
Sumitra Nair
जून 11, 2024 AT 01:02अवश्य ही यह एक महाकाव्य है कि कैसे एक भारतीय हमको मौलिकता की ओर प्रेरित करता है 🌟
विज्ञान और भावना का संगम मानवीय उन्नति को दर्शाता है 🌍
ऐसे परिदृश्य हमें यह याद दिलाते हैं कि सपने साकार होते हैं यदि दृढ़ता साथ हो 😊
Ashish Pundir
जून 11, 2024 AT 02:42टेस्ला की प्रगति में विविध पृष्ठभूमि के इंजीनियरों की भूमिका महत्वपूर्ण है
gaurav rawat
जून 11, 2024 AT 03:49बिलकुल सही कहा! 🙌 आशा है और भी युवा इस रास्ते पर कदम रखेंगे 😃
Vakiya dinesh Bharvad
जून 11, 2024 AT 05:29भारत की शिक्षा प्रणाली अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छाप छोड़ रही है :)
Aryan Chouhan
जून 11, 2024 AT 07:09इत्ती बड़ी बात है पर अभी भी बहुत सुधार की जरूरत है जैसे सॉफ़्टवेयर बग्स ठीक होना चाहिए
Tsering Bhutia
जून 11, 2024 AT 08:32सॉफ़्टवेयर में सुधार निरंतर प्रक्रिया है और टीम हमेशा अपडेट पर काम करती है
Narayan TT
जून 11, 2024 AT 10:12इतिहास के पन्नों में केवल महान मस्तिष्कों का ही उल्लेख रहता है; यह एक और उदाहरण है
SONALI RAGHBOTRA
जून 11, 2024 AT 11:52अशोक की कहानी युवा इंजीनियरों को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और टीम लीडरशिप में दिशा देती है
उनकी रणनीति यह दिखाती है कि जटिल तकनीक को कैसे सरल बनाया जाए
sourabh kumar
जून 11, 2024 AT 13:15सही बात है, ऐसे लीडर से सीखना हर भारतीय को चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए
khajan singh
जून 11, 2024 AT 14:55टेस्ला के ऑटोनॉमिक सिस्टम में सेंसर्स, फ्यूजन एल्गोरिद्म और कंट्रोल थ्योरी का सिम्बायोटिक इंटेग्रेशन आवश्यक है
Dharmendra Pal
जून 11, 2024 AT 16:35इस प्रकार अशोक एलुस्वामी का योगदान न केवल टेस्ला के उत्पाद को ऊँचा उठाता है बल्कि भारतीय तकनीकी प्रतिभा की विश्व में पहचान भी बनाता है
Paurush Singh
जून 11, 2024 AT 18:15बहुत सारे लोग केवल प्रशंसा में ही फंसे रहते हैं लेकिन वास्तविक सफलता की जड़ मेहनत और निरंतर नवाचार में होती है
Sandeep Sharma
जून 11, 2024 AT 19:55ये तो बस एक और उदाहरण है कि असली जीनियस किस तरह ग्लोबल सीन में चमकते हैं 😎
Mita Thrash
जून 11, 2024 AT 21:35अशोक जैसी व्यक्तियों से सीखकर हम भारतीय टेक इकोसिस्टम को और मजबूत बना सकते हैं और नई संभावनाओं को खोल सकते हैं
shiv prakash rai
जून 11, 2024 AT 23:15ओह, बधाई हो, अब तो हर भारतीय को टेस्ला में नौकरी मिलना तय हो गया है 🙄
Subhendu Mondal
जून 12, 2024 AT 00:55ऐसे बड़े नाम का उल्लेख करते हुए अक्सर छोटे खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत अनदेखी रह जाती है; यह केवल एक स्टीरियोटाइप नहीं बनना चाहिए