क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे रोज़मर्रा के जीवन में किसने अपना खून बहाया? पराक्रम दिवस वही दिन है जब हम उन वीर सैनिकों, पुलिसकर्मियों और आम लोगों की कहानियां सुनते हैं जिन्होंने देश को बचाने के लिए खुद को अर्पित किया। इस मौके पर स्कूल‑कॉलेज से लेकर सरकारी दफ्तर तक हर जगह झंडा फहराया जाता है, शहीद स्मारकों पर फूल रखे जाते हैं और उनके नाम के साथ एक छोटा सा वचन दिया जाता है – ‘हम नहीं भूलेंगे’।
भारत में पराक्रम दिवस 15 जनवरी को मनाया जाता है, जो कि सशस्त्र बलों के ‘ऑफिसर डे’ से जुड़ा हुआ है। इस दिन का मकसद सिर्फ़ इतिहास पढ़ना नहीं, बल्कि लोगों को प्रेरित करना भी है ताकि हर कोई अपने आस‑पास की सुरक्षा में योगदान दे सके। कई बार हम बड़े-बड़े वीरों की कहानियां सुनते हैं – जैसे बॉब सिम्पसन की फिटनेस और फील्डिंग पर जिद, या लियॉनल मेसी के मैदान में दिखाए गए दमखम। ये सभी उदाहरण हमें बताते हैं कि असली पराक्रम सिर्फ़ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि हर रोज़ छोटे‑छोटे कदमों में भी हो सकता है।
आप घर पे या ऑफिस में इस दिन को खास बना सकते हैं। सबसे पहला काम – शहीद स्मारकों पर फूल रख कर श्रद्धांजलि देना। स्कूल‑कॉलेज में बच्चों को वीरों की कहानी सुनाने वाले सत्र आयोजित होते हैं, आप भी उन्हें छोटे-छोटे वीडियो या किताबें दे सकते हैं। अगर आपके पास समय है तो किसी वयोवृद्ध सैनिक के घर जाकर उनका अनुभव सुनना एक बेहतरीन तरीका हो सकता है। सोशल मीडिया पर #पराक्रमदिवस हैशटैग डालकर अपनी पोस्ट शेयर करने से आप इस भावना को और लोगों तक पहुँचा सकते हैं।
अगर आपके शहर में कोई सार्वजनिक कार्यक्रम हो रहा है, तो वहां जरूर जाएँ। अक्सर परेड में स्थानीय शहीदों के परिवार भी भाग लेते हैं और उनके जीवन की झलक मिलती है। यह देख कर आपका मन गर्व से भर जाता है और आप समझते हैं कि ये सब कुछ सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि वास्तविक भावना है।
पराक्रम दिवस का असली मकसद हमें याद दिलाना है कि हमारे देश में हर एक को अपने कर्तव्य की पूर्ति करनी चाहिए – चाहे वह सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की मदद करना हो या पर्यावरण के लिए पेड़ लगाना। छोटी‑छोटी चीजें मिलकर बड़ा असर डालती हैं और यही बात इस दिन हमें सीखाती है।
तो अगली बार जब आप पराक्रम दिवस का जश्न मनाएं, तो अपने आस‑पास की उन छोटी‑छोटी वीरता को भी सराहें जो अक्सर अनदेखी रह जाती हैं। आपका एक छोटा सा कदम, किसी के लिये बड़ी प्रेरणा बन सकता है।
जनवरी 23, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जनवरी, 2025 को पराक्रम दिवस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने नेताजी की अद्वितीय योगदान की सराहना की और उन्हें साहस और धैर्य का प्रतीक बताया। मोदी ने ओडिशा में हुए भव्य समारोहों की प्रशंसा की और युवाओं को नेताजी की प्रेरणा से प्रोत्साहित करने की उम्मीद जताई। आजादी की लड़ाई में नेताजी के अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया गया।
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