पिछले कुछ महीनों में फ़्रांस की बिजली सप्लाई में कई बार गिरावट आई है। लोग घर पर लाइट बंद होते देखते हैं, उद्योगों को उत्पादन घटाना पड़ता है और एयर कंडीशनर भी कभी‑कभी काम नहीं करते। इस समस्या के पीछे कई कारण हैं – गैस कीमतें ऊपर, पवन ऊर्जा का उतार‑चढ़ाव और पुरानी बिजली प्लांट्स की रख‑रखाव में देरी।
पहली वजह है यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों का तेज़ा से बढ़ना। रूस‑यूक्रेन जंग के बाद कई देशों ने गैस सप्लाई कम कर दी, और फ़्रांस को भी इसका असर झेलना पड़ा। दूसरे कारण हैं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की अस्थिरता। पवन टरबाइन और सोलार फार्म कभी‑कभी मौसम पर निर्भर होते हैं, इसलिए दिन के कुछ घंटे ही बिजली दे पाते हैं। तीसरी वजह है पुरानी कोयले की फ़ैक्ट्रीज़ का बंद होना या मरम्मत में लंबा समय लगना। ये प्लांट्स अभी भी बहुत ऊर्जा देता है, लेकिन पर्यावरणीय नियमों से इनको धीरे‑धीरे हटाना पड़ रहा है।
सरकार ने कुछ तुरंत कदम उठाए हैं। सबसे बड़ा कदम है पावर बचत अभियान – लोग को बताया जा रहा है कि लाइट कम रखें, एसी की सेटिंग 24 डिग्री पर रखें और अनावश्यक उपकरण बंद करें। साथ ही फ़्रांस ने पड़ोसी देशों से अतिरिक्त बिजली आयात करने के समझौते किए हैं। दीर्घकालिक समाधान में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है – बड़े सोलार पार्क, समुद्री पवन फार्म और हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स पर निवेश हो रहा है। कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि बैटरी स्टोरेज तकनीक विकसित होने से बिजली का बफर बन सकता है, जिससे सप्लाई की कमी नहीं रहेगी।
अगर आप घर में ऊर्जा बचत चाहते हैं तो छोटे‑छोटे कदम काम आते हैं। लाइट्स को LED में बदलें, प्लग पॉवर स्ट्रिप पर सभी गैजेट एक साथ बंद रखें और शॉवर्स के बाद टॉयलेट फ्लश कम करें – ये सब बिजली बिल घटाते हैं। उद्योगों के लिए भी ऊर्जा प्रबंधन सॉफ्टवेयर मददगार साबित हो रहा है; इससे मशीनरी का उपयोग समय‑समय पर मॉनिटर करके अनावश्यक खर्च बचाया जा सकता है।
अंत में एक बात याद रखें – ऊर्जा संकट सिर्फ़ फ़्रांस तक सीमित नहीं, यह पूरे यूरोप की चुनौती है। इसलिए व्यक्तिगत स्तर पर बचत करना और सरकार को नवीकरणीय विकल्पों के लिए दबाव बनाना दोनों ही जरूरी हैं। अगर आप इस टैग पेज को फॉलो करेंगे तो आपको रोज़मर्रा के अपडेट, विशेषज्ञ राय और व्यावहारिक टिप्स मिलते रहेंगे।
अगस्त 6, 2024
फ्रांस में न्यूक्लेअर पावर की निर्भरता और कई रिएक्टरों के मेंटेनेंस के कारण ऊर्जा संकट गहरा गया है। हीटवेव्स ने बिजली की खपत को बढ़ा दिया है और ऊर्जा नियामक ने चेतावनी जारी की है। इस संकट ने फ्रांस की ऊर्जा अवसंरचना की कमजोरी को उजागर किया है और ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की आवश्यकता पर बल दिया है।
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