अगर आप भारत में क्रिकेट देखते हैं तो शायद आपने सचिन का नाम बहुत बार सुना होगा. उनका बैटिंग स्टाइल, मैदान पर धैर्य और लगातार रन बनाना हर उम्र के फैंस को प्रेरित करता है. इस लेख में हम उनके शुरुआती दिनों से लेकर अब तक की यात्रा को आसान भाषा में समझेंगे.
सचिन ने सिर्फ 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट शुरू किया. पहला टेस्ट मैच मुंबई में था, जहाँ उन्होंने 15 रन बनाकर शुरुआत की. धीरे‑धीरे उनका अंडरलाइनिंग भरोसा बढ़ा और 1998 में पहले टेस्ट शतक पर वे 100% हीरो बन गये.
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2014 में 200* दोहरा शतक बनाना थी, जो आज भी रिकॉर्ड में है. कुल मिलाकर उन्होंने टेस्ट में 51 शतकों, ODI में 49 और T20 में कई यादगार पलों को जोड़ दिया. ये आँकड़े उन्हें "क्रिकेट का गॉड" बनाते हैं.
सचिन ने सिर्फ रनों से नहीं, बल्कि मैच‑फीवर पर भी असर डाला. जब भारत की टीम को कठिन स्थिति में होना पड़ता तो वह अक्सर खुद चलकर जीत की राह बना देते थे. उनकी कप्तानी के दौरान कई छोटे‑छोटे मोड़ पर टीम ने अपना आत्मविश्वास पाया.
1998 का कॉर्नवॉल पर 143* एक ऐसा इनिंग था जहाँ उन्होंने भारत को मैच बचाया. फिर 2008 में बांग्लादेश के खिलाफ 194 रन की पारी ने उनके स्टेडियम‑फ़ैन बेस को और मजबूत किया.
आईपीएल में भी सचिन का नाम चमका. मुंबई इंडियंस के लिए कई बार तेज़ी से सिक्स मारते हुए उन्होंने युवा खिलाड़ियों को सीख दी कि दबाव में कैसे खेलना है. उनका फैंटेसी क्रिकेट पर असर आज भी देखा जा सकता है, जहाँ हर साल उनके पॉइंट्स की चर्चा होती है.
सचिन ने 2013 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया, लेकिन अब भी वे विश्लेषक और मेहमान के रूप में टीवी पर आते हैं. उनका अनुभव नए खिलाड़ियों को गाइड करने में काम आता है.
अगर आप सचिन की कोई खास कहानी या आँकड़े देखना चाहते हैं तो हमारी साइट पर "सचिन तेंदुलकर" टैग वाले लेखों को देखें. यहाँ आपको उनके करियर के हर मोड़ का विस्तृत विश्लेषण मिलेगा, चाहे वह शुरुआती दौर हो या बाद के रिकॉर्ड‑ब्रेकिंग इवेंट्स.
अंत में कहा जा सकता है कि सचिन ने सिर्फ रनों से नहीं, बल्कि भारत की क्रिकेट संस्कृति को भी नया रूप दिया. उनका नाम सुनते ही हर भारतीय फैन का दिल धड़कता है और उनके खेल को याद करना हमेशा प्रेरणादायक रहेगा.
सितंबर 1, 2024
जो रूट ने हाल ही में सबसे अधिक टेस्ट रन बनाने के सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को तोड़ने की संभावना पर बात की है। रूट ने अपनी टीम की जीत में योगदान देने को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स का पीछा करना उनका उद्देश्य नहीं है। हालांकि, पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि रूट अपने निरंतर फॉर्म और फिटनेस के साथ तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं।
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