आपने कभी सोचा है कि भारत में सांपों को पूजना क्यों चलता है? यह सिर्फ एक प्राचीन रीति नहीं बल्कि कई लोगों के लिये सुरक्षा और फल‑फूल की कामना भी रखती है। इस लेख में हम समझेंगे कि सांप पूजा का इतिहास क्या है, इसे करने से क्या उम्मीदें होती हैं और घर पर कैसे करें बिना किसी उलझन के.
भारतीय सभ्यता में नाग को शक्ति, ज्ञान और प्रजनन का प्रतीक माना गया है। वेदों में भी ‘अग्नि’ से जुड़े नागों का उल्लेख मिलता है। पुराणों के अनुसार, जब धरती पर बाढ़ या रोग फैला होता था तो लोग नाग देवता की पूजा करके शांति चाहते थे। इस वजह से कई गांवों में अब तक सांप पूजा जारी है – चाहे वह नंदी धारा में स्नान हो या छोटे घरों में मन्ना‑भोग लगाया जाता हो.
सबसे पहले एक साफ जगह चुनें, अक्सर लोग दरवाज़े के सामने या बगीचे में छोटा मंडल बनाते हैं। इसमें कलश, जल और कुछ मिठाइयाँ रखी जाती हैं। फिर आप नीचे लिखे कदमों को फॉलो कर सकते हैं:
पूजा के बाद जगह को साफ़‑सुथरा रखें और जो भी सामग्री इस्तेमाल हुई है उसे जल (पवित्र नदी या तालाब) में डालें – यह पर्यावरण की रक्षा का तरीका माना जाता है.
ध्यान दें कि सांप पूजा में कोई जीवित साँप नहीं रखा जाता। यह पूरी तरह से प्रतीकात्मक होता है, इसलिए किसी भी प्रकार की हिंसा या नुकसान से बचना चाहिए. यदि आपके पास समय कम है तो आप इस अनुष्ठान को केवल एक छोटा रिवाज़ बना सकते हैं – जल और धूप ही पर्याप्त होते हैं.
सांप पूजा करने के बाद कई लोग अपने जीवन में शांति, स्वास्थ्य सुधार या वित्तीय लाभ की अनुभूतियों की रिपोर्ट देते हैं। यह मानना कि सकारात्मक सोच और श्रद्धा से मन और शरीर दोनों को फायदा होता है, वैज्ञानिक रूप से भी समर्थित है. इसलिए आप जब भी इस रीति‑रिवाज़ को अपनाएँ, पूरी निष्ठा और शुद्ध इरादे के साथ करें.
अगर पहली बार कर रहे हैं तो छोटा मंडल बना कर देखें, धीरे‑धीरे अनुभव बढ़ाने पर बड़े समारोह की योजना बनाइए। याद रखें – प्रमुख बात है मन का साफ़ होना और सभी कार्यों में सच्चाई रखनी. यही सिद्धान्त सांप पूजा को आपके जीवन में लाभदायक बनाता है.
अगस्त 8, 2024
नाग पंचमी एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पांचवी तिथि को मनाया जाता है। इस त्यौहार में विशेष रूप से नाग देवताओं, विशेषकर कोबरा की पूजा की जाती है। इसे खुशहाली और सौभाग्य प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन भक्तजन विभिन्न अनुष्ठानों और उपवासों का पालन करते हैं और नागों को दूध, गुड़, और अन्य प्रसाद चढ़ाते हैं।
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