हर साल भारत में कई बच्चों को हिंसा का सामना करना पड़ता है। कभी क़दम-कदम पर खबरें आती हैं, तो कभी दूर-दराज़ गांवों में अंधेरा छा जाता है। आप शायद सोच रहे होंगे – क्यों इतना बुरा होता जा रहा है? इस लेख में हम कारण, केस और बचाव के तरीकों को सरल शब्दों में समझेंगे।
पहला कारण आर्थिक तंगी है। कई परिवार गरीबी से जूझते हैं और बच्चा बेचने या मार डालने की सोच लेते हैं। दूसरा, शिक्षा की कमी – जब लोग पढ़े‑लिखे नहीं होते तो अक्सर बच्चे को नुकसान पहुंचाने के बारे में सही समझ नहीं पाते। तीसरा, सामाजिक दबाव; कुछ जगहों पर लड़कों का जन्म अधिक पसंद किया जाता है और बेटी को बेमतलब का बोझ माना जाता है।
इन कारणों से जुड़े केस देश‑भर में दिखते हैं – जैसे उत्तर प्रदेश की एक गांव में 3 साल के बच्चे की हत्या, या बिहार में बाल शोषण के बाद कोर्ट में सजा सुनाई गई। ऐसे केस हमें बताते हैं कि समस्या सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई परतें हैं जो साथ मिलकर बच्चों को खतरे में डालती हैं।
सरकार ने बाल शोषण रोकथाम कानून (बच्चों के खिलाफ हिंसा) 2015 बनाया है, जिससे अपराधी पर कड़ी सजा मिलती है। साथ ही हर राज्य में बच्चा हेल्पलाइन चल रही है – अगर आप या आपके जानने वाले को कोई खतरा महसूस हो तो तुरंत कॉल करें।
स्कूलों में भी सुरक्षा बढ़ाने की कोशिशें शुरू हुई हैं। कुछ स्कूल अब CCTV कैमरे लगा रहे हैं और शिक्षक बच्चों के साथ व्यक्तिगत बातचीत करके किसी असामान्य व्यवहार को पकड़ते हैं। यह छोटे‑छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं।
आपके पास भी एक शक्ति है: अपने आसपास की खबरों पर नजर रखें, अगर कोई बच्चा ग़ैर‑सुरक्षित दिखे तो तुरंत स्थानीय पुलिस या बाल संरक्षण केंद्र से संपर्क करें। साथ ही सामाजिक संगठनों को दान देकर आप बचाव कार्य में मदद कर सकते हैं।
अंत में, याद रखिए – हर बच्चे का जीवन अनमोल है। अगर हम सब मिलकर जागरूक रहें और छोटे‑छोटे कदम उठाएं तो बच्चों की हत्या पर रोक लग सकती है। सवाल पूछें, जानकारी शेयर करें और सुरक्षित वातावरण बनाएं।
अगस्त 30, 2024
भारतीय अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में छह बच्चों की हत्या के लिए जिम्मेदार तीन भेड़ियों में से एक को पकड़ लिया है। ड्रोन और थर्मल मैपिंग सॉफ्टवेयर जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके यह सफलता हासिल की गई। बाकी भेड़ियों को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
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