अगर आप टैक्स से जुड़ी खबरें रोज़ देखना चाहते हैं, तो यह पेज आपके लिए बना है। यहाँ हम भारत के कर विभाग की नई नीतियों, नियमों और अपडेट को सरल भाषा में समझाते हैं। चाहे आप व्यक्तिगत आयकर फाइल करना चाहते हों या व्यवसायिक GST का हिसाब रखना हो, सब कुछ यहीं मिलेगा।
पिछले साल आईआरएस ने कई बदलाव पेश किए – जैसे टैक्स स्लैब में थोड़ी कटौती और रिटर्न फाइल करने की आखिरी तिथि को एक हफ्ता आगे बढ़ा दिया। इन बदलावों से आपका टैक्स लायबिलिटी कम या ज्यादा हो सकती है, इसको समझना जरूरी है। अगर आप पहले से ऑनलाइन पोर्टल पर अपना इन्कम टैक्स रिटर्न भरते हैं, तो नई स्लैब के हिसाब से अपने आय को वर्गीकृत करें और सही फॉर्म चुनें।
GST में भी कुछ अहम अपडेट आए हैं – छोटे व्यापारियों को अब इनवॉइस जनरेट करने का समय दो दिन घटाकर एक कर दिया गया है। साथ ही, कॉम्पोज़िट स्कीम के तहत टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये तक की कंपनियां अब रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म से मुक्त हैं। ये बदलाव छोटे उद्यमियों को आसान बनाते हैं और प्रशासनिक बोझ घटाते हैं।
टैक्स बचाने का सबसे असरदार तरीका है सही निवेश करना। सेक्शन 80C, 80D, 80GG आदि के तहत आप अपने निवेश को अधिकतम सीमा तक ले जा सकते हैं और आयकर से छूट पा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, जीवन बीमा प्रीमियम, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) या इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) में सालाना 1.5 लाख रुपये का निवेश कर आप काफी बचत कर सकते हैं।
एक और आसान तरीका है HRA क्लेम – अगर आप किराए पर रह रहे हैं, तो अपने वेतन पर्ची में HRA की सही एंट्री रखें और घर के बिलों को भी रिकॉर्ड करें। इससे आपका टैक्सेबल इनकम घटता है और रिफंड मिलने की सम्भावना बढ़ती है।
यदि आपके पास कई स्रोतों से आय होती है, जैसे फ्रीलांसिंग या किराया, तो सभी इन्कम को एक ही फ़ॉर्म में जोड़ें। इससे आईआरएस के साथ कोई असंगति नहीं होगी और आपको बाद में दंड नहीं देना पड़ेगा।
अंत में, टैक्स रिटर्न दाखिल करने की आख़िरी तिथि से पहले सभी दस्तावेज़ तैयार रखें – फॉर्म 16, बैंक स्टेटमेंट, निवेश प्रमाणपत्र आदि। देर से फ़ाइलिंग पर जुर्माना और ब्याज लग सकता है, इसलिए समय का पालन करें।
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अगस्त 1, 2024
भारतीय कर प्राधिकरण द्वारा इन्फोसिस को ₹32,000 करोड़ के कर नोटिस देने के बाद, अन्य प्रमुख आईटी सेवाओं कंपनियों को भी नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। यह मामला आईटी क्षेत्र में कर चोरी के आरोपों की व्यापक जांच का हिस्सा है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े नोटिस के बाद, अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ भी ऐसी कार्रवाई हो सकती है।
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