भारत में भूख का मुद्दा हर साल बड़े सवालों को जन्म देता है। बारिश, बाढ़ या असमान आय वितरण से किसान और आम लोग दोनों प्रभावित होते हैं। इस पेज पर हम उस समय की ताज़ा ख़बरें लाते हैं जब भूखमरि हमारे जीवन के करीब आती है और साथ में आसान समाधान भी बताते हैं।
पिछले हफ़्ते आईएमडी ने उत्तर भारत, यूपी‑बीिहार और पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया। बाढ़ और भूस्खलन की वजह से कई गाँवों में फसलें नष्ट हो गईं, जिससे अनाज की कीमतें बढ़ीं और गरीब परिवारों को रोटी मिलना मुश्किल हुआ। इसी तरह, मौसम विभाग ने अगले दो हफ़्ते तक भी भारी बारिश का अनुमान लगाया है, इसलिए किसानों को अतिरिक्त उपाय अपनाने चाहिए।
क्रिक्केट और खेल से जुड़ी खबरें भी इस टैग में आती हैं जब खिलाड़ी या टीम के प्रदर्शन से जनता का मनोबल बढ़ता‑घटता है। जैसे कि बॉब सिम्पसन की मृत्यु ने ऑस्ट्रेलिया में कई लोगों को शोक में डाल दिया, लेकिन यह बात सीधे भूखमरि से नहीं जुड़ी। फिर भी, खेलों की बड़ी जीतें अक्सर स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करती हैं और अस्थायी रूप से खाद्य सुरक्षा में मदद कर सकती हैं।
उदाहरण के तौर पर, IPL 2025 के मैचों से जुड़े स्टेडियम शहरों में होटल, रेस्तरां और किराना दुकानें भरपूर लाभ कमाते हैं। जब लोग बड़े इवेंट देखना चाहते हैं तो उनका खर्चा बढ़ता है, जिससे खाने‑पीने की चीज़ों की मांग भी बढ़ती है। यह छोटा‑सा आर्थिक उछाल कभी‑कभी भूखमरि को घटाने में मदद करता है।
भूख के जोखिम को कम करने के लिए कुछ आसान कदम अपनाए जा सकते हैं। सबसे पहले, स्थानीय सरकारी योजनाओं जैसे पोषण कार्ड या खाद्य सुरक्षा योजना की जानकारी रखें। ये स्कीम अक्सर जरूरतमंदों तक सीधे अनाज पहुंचाती हैं और तुरंत मदद कर सकती हैं।
दूसरा तरीका है सामुदायिक बगीचे बनाना। अगर आपके पास थोड़ी ज़मीं या बालकनी है तो आप खुद सब्ज़ियां उगा सकते हैं। इससे घर में ताज़ी सब्ज़ियों की उपलब्धता बढ़ती है और खर्च भी बचता है। कई NGOs इस दिशा में ट्रेनिंग दे रहे हैं, इसलिए उनके साथ जुड़ना फायदेमंद रहेगा।
तीसरा कदम है खाने‑पीने के सही प्रबंधन पर ध्यान देना। बचे हुए भोजन को फ्रिज में सुरक्षित रखना या दान केंद्रों को देना भूखमरि से लड़ने का आसान तरीका है। आप अपने पड़ोस में फ़ूड बैंक की जानकारी लेकर जरूरतमंदों तक मदद पहुंचा सकते हैं।
अंत में, मौसम के बदलाव और सरकारी नीतियों पर नजर रखें। अगर किसी जिले में बाढ़ या सूखे का खतरा बताया गया हो तो स्थानीय अधिकारियों से तुरंत सहायता मांगें। अक्सर राहत कैंप और भोजन वितरण की व्यवस्था जल्द ही शुरू हो जाती है।
भूखमरि एक जटिल समस्या है, लेकिन छोटे‑छोटे कदम मिलकर बड़ा फर्क डाल सकते हैं। इस टैग पर आने वाले अपडेट पढ़ते रहें, जानकारी रखें और जरूरतमंदों को मदद का हाथ बढ़ाएं। आपके द्वारा किया गया छोटा योगदान किसी की भूखी पेट को भरने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
अक्तूबर 17, 2024
विश्व खाद्य दिवस प्रत्येक वर्ष 16 अक्टूबर को भूख और कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इन मुद्दों के खिलाफ कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिन की स्थापना 1979 में खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा की गई थी। 2024 की थीम 'सभी को भोजन का अधिकार' है, जो खाने के बुनियादी मानव अधिकार पर जोर देती है।
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