अगर आप क्रिकेट का शौक रखते हैं तो बॉब सिम्पसन नाम जरूर सुनते होंगे. वो सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि एक ऐसे कोच भी थे जिनका असर आज तक दिखता है। इस पेज पर हम उनके जीवन के मुख्य मोड़, खेल में उनकी उपलब्धियां और भारत की टीम पर उनका प्रभाव आसान भाषा में बताएंगे।
सिम्पसन का जन्म 1936 में ऑस्ट्रेलिया में हुआ था. बचपन से ही उन्हें क्रिकेट पसंद आया, स्कूल के मैदानों पर गेंद को मारते हुए उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। 1957 में उन्होंने टेस्ट डेब्यू किया और जल्दी ही अपनी स्थिर बल्लेबाज़ी से टीम का भरोसेमंद सदस्य बन गए। उनका पहला शतक इंग्लैंड के खिलाफ था, जो उनके करियर की शुरुआत में एक बड़ा मोड़ रहा।
खेल से रिटायर होने के बाद सिम्पसन ने कोचिंग का रास्ता चुना. 2000 में वे भारत के टेस्ट टीम के प्रमुख कोच बने और दो साल तक इस पद पर रहे. उनके अधीन भारतीय पिच पर खेलते समय बैट्समैन की तकनीक सुधर गई, खासकर वैली और कपिल। उन्होंने धैर्य और फोकस पर ज़ोर दिया, जिससे खिलाड़ियों ने कठिन परिस्थितियों में भी टिक कर जीत हासिल की.
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2001 का कोहली टेस्ट याद है, जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया को एड़ी-एड़ी लड़ाई में हराया. सिम्पसन की रणनीति और मानसिक तैयारी ने इस जीत को संभव बनाया. कई खिलाड़ी खुद मानते हैं कि उनके बिना यह जर्नी मुश्किल होती.
बॉब सिम्पसन सिर्फ आंकड़ों के पीछे नहीं थे, बल्कि उन्होंने टीम में एक सकारात्मक माहौल भी बनाकर रखा. ट्रेनिंग के दौरान उनका तरीका बहुत सरल था – बातों से ज्यादा काम करवाते और खिलाड़ी की व्यक्तिगत जरूरतें समझते। यही कारण है कि आज कई कोच उन्हें आदर्श मानते हैं.
अगर आप उनकी बल्लेबाज़ी देखना चाहते हैं, तो उनके कुछ यादगार इनिंग्स यूट्यूब पर आसानी से मिलेंगे. उनका सबसे बड़ा टेस्ट स्कोर 311* था, जो अभी भी ऑस्ट्रेलिया की रिकॉर्ड में जगह बना रहा है. यह innings दिखाती है कि कैसे धैर्य और सतर्कता से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं.
समय के साथ सिम्पसन ने कई नई तकनीकों को अपनाया जैसे फिटनेस रूटीन, वीडियो एनालिसिस आदि. उन्होंने कहा था “क्रिकेट सिर्फ बल्ले से नहीं, दिमाग से भी खेला जाता है”. यही बात आज के युवा खिलाड़ी अक्सर दोहराते हैं.
बॉब सिम्पसन की कहानी हमें यह सिखाती है कि एक खिलाड़ी का असर केवल उसके रन या विकेट तक सीमित नहीं होता. उनका कोचिंग एरा में योगदान दिखाता है कि कैसे सही मार्गदर्शन से पूरी टीम उन्नत हो सकती है। अगर आप क्रिकेट के बारे में गहराई से समझना चाहते हैं तो उनके इंटरव्यू और लेख पढ़ें, बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.
आखिरकार, बॉब सिम्पसन का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा रहेगा. उनका योगदान न सिर्फ आँकड़ों में बल्कि कई खिलाड़ियों की ज़िन्दगी में भी झलकता है। इस पेज पर आप उनके बारे में पूरी जानकारी पा सकते हैं और आगे के लेखों में उनकी नई कहानियों को फॉलो कर सकते हैं.
अगस्त 21, 2025
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के दिग्गज बॉब सिम्पसन का सिडनी में 89 वर्ष की उम्र में निधन। 62 टेस्ट में 4,000+ रन, 71 विकेट और बेहतरीन स्लिप फील्डर के रूप में पहचान। 1986-96 के बीच पहले फुलटाइम कोच बनकर 1987 वर्ल्ड कप, 1989 एशेज और 1995 में वेस्टइंडीज पर ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनकी सख्त फिटनेस और फील्डिंग संस्कृति ने ऑस्ट्रेलिया को बदल दिया।
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