भारत की लोकतंत्र की नींव है चुनाव आयोग, भारत संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय जो देश भर के निर्वाचन की निगरानी करता है। यह कोई सरकारी विभाग नहीं, बल्कि एक ऐसा संस्थान है जिसकी आजादी को संविधान ने अपनी रक्षा के लिए खास तौर पर सुरक्षित किया है। यही कारण है कि जब भी कोई चुनाव होता है—चाहे वो लोकसभा हो, विधानसभा हो, या फिर किसी ग्राम पंचायत का—तो पूरा देश इसी एक संगठन पर भरोसा करता है।
चुनाव आयोग के अंतर्गत आता है सभी चुनावों की योजना बनाना, मतदान की व्यवस्था करना, मतदाता सूची तैयार करना, चुनाव चिह्न आवंटित करना, और निर्वाचन अपराधों की जांच करना। इसके साथ ही यह चुनाव प्रचार के लिए आचार संहिता भी तैयार करता है। जब राजनीतिक दल अपने चुनावी नारे लगाते हैं, तो उनकी ये बातें चुनाव आयोग के नियमों के अंदर ही होती हैं। यही वजह है कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव भी शांति से हो पाता है।
चुनाव आयोग के साथ जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तत्व हैं निर्वाचन आयोग, चुनाव आयोग का ही दूसरा नाम, जो आम बोलचाल में अक्सर इस्तेमाल होता है, मतदाता सूची, हर वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार देने के लिए बनाई गई डिजिटल लिस्ट, जिसमें नाम नहीं तो वोट नहीं, और चुनाव आचार संहिता, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए एक नियमों का नक्शा जो निष्पक्षता और न्याय की गारंटी देता है। ये सब एक साथ काम करके यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी व्यक्ति या पार्टी अपने लाभ के लिए नियम तोड़ न पाए।
भारत में हर चुनाव में करोड़ों लोग भाग लेते हैं—कुछ तो रात भर जागकर मतदान के लिए लाइन में खड़े हो जाते हैं। इसके पीछे का जिम्मेदार बना हुआ है चुनाव आयोग। इसके बिना यहाँ कोई चुनाव नहीं होता। आपके देखे गए खबरें—जैसे बीसीसीआई के अध्यक्ष का चुनाव, या फिर किसी राज्य की विधानसभा के नतीजे—सब इसी आयोग के निर्णयों और नियमों के तहत होते हैं।
इस पेज पर आपको चुनाव आयोग से जुड़ी सभी ताजा खबरें मिलेंगी—चाहे वो चुनाव के नियमों में बदलाव हों, या फिर किसी बड़े चुनाव की तैयारियाँ चल रही हों। हमने उन खबरों को चुना है जो आपको बताती हैं कि आपका वोट कैसे गिना जाता है, कौन देखता है कि कोई नियम न टूटे, और कैसे एक आम आदमी का वोट देश का भविष्य बदल सकता है।
राजस्थान और केरल में SIR के दबाव में दो BLO शिक्षकों ने आत्महत्या कर ली। चुनाव आयोग ने कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी, जबकि शिक्षक संघ ने SIR को स्थगित करने की मांग की।
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