कर वृद्धि क्या है और इसका प्रभाव

पिछले कुछ महीनों में टैक्स बिल बढ़ते देखे हैं? आप अकेले नहीं हैं. कर वृद्धि का मतलब बस इतना ही नहीं कि सरकार की खजाने में थोड़ा-बहुत पैसा आएगा, बल्कि यह आपके जॉब सैलरी, लोन EMI और रोज़मर्रा के खर्चों पर सीधे असर डालता है। इस लेख में हम बात करेंगे क्यों टैक्स बढ़ा, कौन‑से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, और आप कैसे अपनी जेब बचा सकते हैं.

सरकार की नई कर नीति क्यों बदल रही है?

हर साल बजट के साथ कुछ नयी धारा आती है। 2025 का बजट खासकर इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव, गैसोलिन पर सूसाइड चार्ज और डिजिटल सेवाओं पर अतिरिक्त टैक्स लेकर आया। सरकार कहती है कि ये कदम इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा के बड़े प्रोजेक्ट्स को फंड करने के लिये जरूरी हैं. लेकिन वास्तविक कारण अक्सर दो होते हैं – राजस्व की कमी और महंगाई को काबू में रखने का दबाव.

ज्यादा टैक्स लगाने से सरकार बड़ी योजनाओं को तेज़ी से शुरू कर सकती है, पर आम आदमी को उसका बोझ उठाना पड़ता है. उदाहरण के तौर पर, यदि आपकी सालाना आय 10 लाख रुपये है तो पहले 5% स्लैब में आप कम टैक्स देते थे, अब वही रेंज 7% तक बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब सिर्फ कुछ ही हज़ार रुपये का अतिरिक्त भुगतान.

आपके लिए तुरंत मददगार बचाव उपाय

टैक्स बढ़ने से डरते हुए अक्सर लोग निवेश बंद कर देते हैं, पर सही योजना के साथ आप टैक्स को कम भी कर सकते हैं। सबसे पहले अपने खर्चों की लिस्ट बनाइए और देखें कहाँ कटौतियाँ मिल सकती हैं – जैसे हाउस रेंट एलाउंस (HRA), मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम या स्टॉक ऑप्शन्स. इनको सही ढंग से डिक्लेयर करने से टैक्स में काफी बचत हो जाती है.

दूसरा कदम – सेक्शन 80C, 80D आदि के तहत उपलब्ध निवेश विकल्पों का पूरा फायदा उठाइए। पब्लिक प्रॉवाइडेड फंड (PPF), इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) या लाइफ इन्शुरेंस प्लान्स में सालाना ₹1.5 लाख तक निवेश कर आप टैक्स बचा सकते हैं.

तीसरा, अगर आपके पास फ्रिलांस या साइड बिज़नेस है तो उसका खर्च भी टैक्स से घटाया जा सकता है। ऑफिस के किराए, इंटरनेट बिल, और काम‑से‑जुड़ी अन्य लागतें सभी डिडक्टेबल हैं. बस रसीदें संभाल कर रखें.

अंत में, हर साल अपने फ़ॉर्म को दोबारा चेक करें या किसी भरोसेमंद अकाउंटेंट से सलाह लें। छोटी‑छोटी त्रुटियों की वजह से भी ओवरपेमेन्ट हो सकता है, और उसे रिफंड के रूप में वापस मिलाना आसान नहीं होता.

तो अगली बार जब बजट की खबरें सुनें, तो घबराएँ नहीं. समझदारी से प्लान बनाइए, सही कटौतियों को अपनाइए और टैक्स बढ़ोतरी को अपने खर्च पर हावी न होने दें. त्रयी समाचार आपके साथ है – हर बदलाव में स्पष्टता और सरल समाधान.

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, वायदा और विकल्प कर में बढ़ोतरी का असर
Ranjit Sapre

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, वायदा और विकल्प कर में बढ़ोतरी का असर

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सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, वायदा और विकल्प कर में बढ़ोतरी का असर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वायदा और विकल्प (एफ एंड ओ) कर में वृद्धि की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार के सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट देखी गई। निफ्टी ने पहले 73.3 अंक बढ़कर 24,582.55 का स्तर छुआ था, परंतु बाद में 435.05 अंकों की गिरावट के साथ 24,074.20 पर आ गया। 7वें केंद्रीय बजट के प्रस्तुतीकरण के दौरान यह वृद्धि की गई थी।

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