तुंगभद्रा नदी पर बना यह बड़ा बांध दक्षिण भारत में जलसंकलन, कृषि और बिजली के लिये अहम है। अगर आप कभी इस क्षेत्र की यात्रा करते हैं तो यहाँ का दृश्य देख कर समझेंगे कि पानी कैसे जीवन बदलता है।
तुंगभद्रा बांध का काम 1953 में शुरू हुआ था और 1960 के दशक में पूरा हुआ। सरकार ने इसे जल संकट को कम करने, बाढ़ रोकने और हाइड्रोपावर बनाने के लिये बनाया था। इस बाड़े की कुल क्षमता लगभग 30 करोड़ क्यूबिक मीटर है और इसमें दो मुख्य जनरेटर लगे हैं जो मिलकर साल भर लगभग 300 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं।
अब बांध आसपास के किसान को सिंचाई पानी देता है, जिससे फसलें बेहतर होती हैं। साथ ही, इस जलाशय पर नौकायन, मछली पकड़ना और पिकनिक जैसी गतिविधियां लोकप्रिय हैं। कई होटल और रिसॉर्ट्स भी यहाँ बने हैं, इसलिए आप एक दिन की ट्रिप के लिए इसे चुन सकते हैं।
बांध का पानी शहरों को पीने योग्य बनाकर सप्लाई करता है, खासकर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में। जल गुणवत्ता मॉनिटरिंग टीम नियमित रूप से पानी की जाँच करती है ताकि स्वास्थ्य जोखिम कम रहें।
अगर आप पर्यावरण के बारे में सोचते हैं तो बांध ने कई नदियों को नियंत्रित करके नीचे के इलाकों में बाढ़ का खतरा घटाया है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के असर से बचाव हेतु यह एक महत्वपूर्ण संरचना बन गया है।
भविष्य में सरकार बांध की क्षमता बढ़ाने और सौर ऊर्जा संयंत्र जोड़ने की योजना बना रही है। इससे न सिर्फ बिजली का उत्पादन बढ़ेगा बल्कि साफ़ ऊर्जा का इस्तेमाल भी होगा।
तो अगर आप तुंगभद्रा बांध के बारे में जानकारी चाहते थे, तो अब आपके पास इतिहास, वर्तमान उपयोग और भविष्य की योजनाओं की पूरी झलक है। अगली बार जब इस क्षेत्र की यात्रा करें, तो इन बातों को याद रखिए और बाड़े का महत्व समझिए।
अगस्त 12, 2024
तुंगभद्रा बांध का एक गेट भारी बारिश के कारण बहने के बाद, संयुक्त कर्नूल जिला में सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस घटना से बांध की सुरक्षा और संरचनात्मक अखंडता पर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और सिंचाई विभाग के अधिकारी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने संभावित बाढ़ को रोकने के उपाय शुरू किए हैं।
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