किम जोंग उन ने अपनी बेटी के साथ परमाणु पनडुब्बी का किया निरीक्षण

Ranjit Sapre अप्रैल 9, 2026 अंतरराष्ट्रीय 0 टिप्पणि
किम जोंग उन ने अपनी बेटी के साथ परमाणु पनडुब्बी का किया निरीक्षण

उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत में एक बड़ी छलांग लगाते हुए पहली बार अपनी निर्माणाधीन परमाणु-संचालित पनडुब्बी की तस्वीरें दुनिया के सामने रखी हैं। किम जोंग उन, जो उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता हैं, हाल ही में अपनी बेटी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक गुप्त शिपयार्ड पहुंचे ताकि इस रणनीतिक हथियार की प्रगति का जायजा ले सकें। यह विकास इसलिए अहम है क्योंकि परमाणु पनडुब्बी समुद्र के नीचे लंबे समय तक छिपकर रहने और घातक मिसाइलें दागने की क्षमता रखती है, जो सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

शुरुआत में मार्च 2026 में कुछ धुंधली तस्वीरें सामने आई थीं, लेकिन दिसंबर 2025 तक कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने विस्तृत तस्वीरें जारी कीं। इन तस्वीरों में एक विशाल बरगंडी रंग की पनडुब्बी दिखाई दे रही है, जिस पर जंग रोकने वाला पेंट (anti-corrosion paint) लगाया गया है। यह जहाज लगभग 8,700 टन का है और असेंबली हॉल के अंदर पूरी तरह से तैयार नजर आ रहा है।

तैयार है 'समुद्र का दानव': तकनीकी बारीकियां

दक्षिण कोरियाई नौसेना के एक पूर्व पनडुब्बी अधिकारी, मून, का कहना है कि पनडुब्बी की पूरी संरचना का दिखना इस बात का संकेत है कि ज्यादातर उपकरण लगाए जा चुके हैं। उनके शब्दों में, "यह जहाज अब बस पानी में उतारे जाने की तैयारी में है।" यह केवल एक जहाज नहीं, बल्कि एक तैरता हुआ मिसाइल बेस है।

दिलचस्प बात यह है कि किम जोंग उन ने इस लक्ष्य को पहले ही तय कर लिया था। जनवरी 2021 में, वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की 8वीं कांग्रेस के दौरान उन्होंने पांच साल की एक व्यापक हथियार विकास योजना पेश की थी। सितंबर 2023 में उन्होंने 'हीरो किम कुन ओक' नामक अपनी पहली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी का अनावरण किया था, लेकिन तब से उनका पूरा जोर "गो न्यूक्लियर" यानी नौसेना को परमाणु शक्ति से लैस करने पर रहा है।

रूस के साथ गुप्त डील और $5.52 बिलियन का खेल

अब सवाल यह उठता है कि उत्तर कोरिया ने इतनी जटिल तकनीक इतनी जल्दी कैसे हासिल कर ली? यहाँ एंट्री होती है रूस की। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के विश्लेषण के अनुसार, रूस और उत्तर कोरिया के बीच हथियारों के सौदे करीब $5.52 बिलियन के हो सकते हैं।

अंदाजा लगाया जा रहा है कि रूस, उत्तर कोरिया से मिलने वाले हथियारों और मिसाइलों के बदले उसे तीन बड़ी तकनीकें दे रहा है: इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM), परमाणु पनडुब्बियां और उन्नत सैटेलाइट तकनीक। सितंबर 2023 में जब किम जोंग उन रूस गए थे, तो उन्होंने व्लादिवोस्तोक में रूसी पैसिफिक फ्लीट मुख्यालय और 'मार्शल शापोशनिकोव' फ्रिगेट का दौरा किया था। यह कोई साधारण टूरिस्ट विजिट नहीं थी; वह वहां की पनडुब्बी तकनीक को समझने गए थे।

व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा संचार सलाहकार जॉन किर्बी ने भी पुष्टि की है कि अमेरिका ने रूस और उत्तर कोरिया के बीच इस तरह के तकनीकी आदान-प्रदान के सबूत देखे हैं। व्हाइट हाउस की एक वरिष्ठ अधिकारी मीरा रैप-हूपर ने माना कि उत्तर कोरिया विशेष रूप से रूसी बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन उपकरणों में रुचि रखता है।

क्षेत्रीय अस्थिरता और अमेरिका की चिंताएं

इस परमाणु पनडुब्बी के आने से प्रशांत महासागर और ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) में समीकरण बदल जाएंगे। अमेरिकी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर मिशन अब और अधिक जटिल हो जाएंगे, क्योंकि परमाणु पनडुब्बी को ट्रैक करना डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल होता है।

वहीं दूसरी ओर, किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया की अपनी परमाणु पनडुब्बी विकसित करने की योजनाओं की कड़ी आलोचना की है। उनका आरोप है कि दक्षिण कोरिया की यह कोशिश अमेरिका द्वारा समर्थित है और यह उत्तर कोरिया की समुद्री संप्रभुता के लिए खतरा है। यह एक अजीब स्थिति है—दोनों तरफ से परमाणु दौड़ शुरू हो चुकी है, लेकिन एक-दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे हैं।

आगे क्या होगा? हथियारों का बढ़ता अंबार

किम जोंग उन ने केवल पनडुब्बी ही नहीं, बल्कि मिसाइलों और गोला-बारूद के उत्पादन को बढ़ाने का भी आदेश दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाला साल "बहुत व्यस्त" रहने वाला है, हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि किस घटना की तैयारी की जा रही है। यह सस्पेंस इस क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया अब अपनी नौसेना को एक 'ग्लोबल पावर' के रूप में पेश करना चाहता है। यदि यह 8,700 टन का जहाज सफलतापूर्वक समुद्र में उतरता है, तो यह उत्तर कोरिया के परमाणु प्रतिरोध (Nuclear Deterrence) को एक नई ऊंचाई देगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

उत्तर कोरिया की परमाणु पनडुब्बी अन्य पनडुब्बियों से कैसे अलग है?

परमाणु पनडुब्बी में परमाणु रिएक्टर का उपयोग किया जाता है, जिससे इसे बार-बार सतह पर आने या ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती। यह डीजल पनडुब्बियों की तुलना में महीनों तक पानी के नीचे रह सकती है और चुपचाप दुश्मन के करीब पहुँचकर हमला कर सकती है।

रूस इस विकास में कैसे मदद कर रहा है?

CSIS की रिपोर्ट के अनुसार, रूस और उत्तर कोरिया के बीच लगभग $5.52 बिलियन का सैन्य समझौता हुआ है। रूस उत्तर कोरिया को उन्नत पनडुब्बी डिजाइन, इंजन तकनीक और परमाणु रिएक्टर संचालन की जानकारी दे रहा है, जिसके बदले में रूस को युद्ध के लिए मिसाइलें और गोला-बारूद मिल रहा है।

इस पनडुब्बी का वजन और क्षमता क्या है?

उत्तर कोरियाई मीडिया के अनुसार, यह पनडुब्बी 8,700 टन की है। यह एक रणनीतिक निर्देशित मिसाइल पनडुब्बी है, जिसका अर्थ है कि यह पानी के नीचे से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागने में सक्षम है।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया इस पर कैसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं?

अमेरिका ने रूस और उत्तर कोरिया के बीच तकनीकी सहयोग पर चिंता जताई है। दक्षिण कोरिया भी अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु पनडुब्बी कार्यक्रम पर विचार कर रहा है, जिसे उत्तर कोरिया एक आक्रामक कदम मान रहा है।

किम जोंग उन ने इस प्रोजेक्ट की घोषणा कब की थी?

किम जोंग उन ने पहली बार जनवरी 2021 में वर्कर्स पार्टी की 8वीं कांग्रेस के दौरान परमाणु पनडुब्बी बनाने का लक्ष्य रखा था। तब से उन्होंने कई बार सैन्य निरीक्षणों के दौरान इस पर जोर दिया है।

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