जब आप किसी चुनाव में वोट डालते हैं, तो आपकी आवाज़ एक बूथ लेवल ऑफिसर, एक ऐसा स्थानीय अधिकारी जो मतदान केंद्र के स्तर पर चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाता है. यह उसी आदमी या औरत का काम होता है जो आपके इलाके के हर घर को जानता है, जिसने आपके पड़ोस में वोटर लिस्ट अपडेट की है, और जिसने आपके नाम को मतदान सूची में शामिल करवाया है। ये लोग किसी बड़े अधिकारी नहीं होते, लेकिन उनके बिना भारत का चुनाव असंभव है।
एक बूथ लेवल ऑफिसर, एक ऐसा स्थानीय अधिकारी जो मतदान केंद्र के स्तर पर चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाता है. यह उसी आदमी या औरत का काम होता है जो आपके इलाके के हर घर को जानता है, जिसने आपके पड़ोस में वोटर लिस्ट अपडेट की है, और जिसने आपके नाम को मतदान सूची में शामिल करवाया है। ये लोग किसी बड़े अधिकारी नहीं होते, लेकिन उनके बिना भारत का चुनाव असंभव है।
ये ऑफिसर बस वोटर लिस्ट चलाने तक सीमित नहीं हैं। वो चुनावी निगरानी के लिए बूथ पर बैठते हैं, वोटर्स की पहचान चेक करते हैं, ईवीएम के साथ लाइव काम करते हैं, और किसी भी शिकायत का तुरंत जवाब देते हैं। कई बार वो खुद बूथ ऑफिसर बनते हैं, या फिर किसी वोटर को इस जिम्मेदारी देते हैं। ये लोग अक्सर राजनीति से दूर रहते हैं, लेकिन उनकी निष्पक्षता ही चुनाव की विश्वसनीयता का आधार है।
कोई भी वोटर जो 18 साल का हो और अपने बूथ का निवासी हो, उसे इस पद के लिए नामांकित किया जा सकता है। इलेक्टरल कमीशन की ओर से इनकी चयन प्रक्रिया बहुत सरल होती है—कोई परीक्षा नहीं, कोई योग्यता नहीं, बस विश्वसनीयता और स्थानीय जुड़ाव। अक्सर ये पद स्कूल टीचर, स्थानीय व्यापारी, या ग्राम पंचायत के सदस्यों को दिया जाता है। ये लोग चुनाव आयोग की ओर से ट्रेनिंग लेते हैं, ईवीएम का इस्तेमाल सीखते हैं, और वोटिंग दिन के लिए तैयार हो जाते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बूथ पर वोटर्स की लाइन कैसे इतनी तेज़ी से चलती है? ये सब इन बूथ लेवल ऑफिसर्स की व्यवस्था की वजह से है। वो जानते हैं कि कौन आएगा, कौन नहीं आएगा, किसकी पहचान कार्ड खो गई है, और किसके नाम को अभी अपडेट करना है। वो बिना किसी रिकॉर्ड के भी बता देते हैं कि आपका वोट दर्ज हुआ है या नहीं।
ये लोग राजनीति के बाहर होते हैं, लेकिन राजनीति के दिल में रहते हैं। जब कोई चुनाव आता है, तो ये लोग बिना किसी वेतन के, बिना किसी प्रशंसा के, अपने बूथ पर बैठ जाते हैं। उनकी निष्पक्षता ही भारत के लोकतंत्र की नींव है। आपके इलाके का बूथ लेवल ऑफिसर आपका पड़ोसी हो सकता है, आपके बच्चे का टीचर हो सकता है, या फिर आपके घर के सामने की दुकान का मालिक। और यही तो असली ताकत है—जब लोकतंत्र आपके घर के बाहर शुरू होता है।
इस पेज पर आपको ऐसे ही कई रिपोर्ट्स मिलेंगी जो बूथ लेवल ऑफिसर्स की दिनचर्या, उनकी चुनौतियां, और उनके बारे में जानकारियां देती हैं—जिन्हें आमतौर पर कोई नहीं देखता, लेकिन जिनके बिना कोई चुनाव नहीं होता।
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