ईद-उल-अज़हा इस साल भारत में 21 जुलाई 2025 को मनाई जाएगी। यह त्यौहार रमजान के महीने के अंत में आता है और इसका मुख्य मकसद कुरान की कथा में हज़र (अली) की ईमान‑दारी को याद करना है। अगर आप पहली बार इस त्योहार को देख रहे हैं या फिर नई जानकारी चाहते हैं, तो नीचे दिए गए बिंदु आपके काम आएँगे।
उफ़तार के बाद जुम्मा की विशेष नमाज़ पढ़ी जाती है। इस नमाज़ को Eid prayer कहते हैं, जो खुले मैदान या बड़ी मस्जिदों में जमा होकर की जाती है। दो राक़ात की नमाज़ के बाद इमाम क़ुबूल करते हैं कि हर मुसलमान एक बकरी या भेड़ का बलि‑दान कर सकता है। यह बलि‑दान गरीब लोगों को बाँटना इस त्योहारी भावना का मूल भाग है।
ईद की रसमों में सबसे लोकप्रिय व्यंजन बिरयानी, कबाब, हलवा और सेवइयाँ हैं। कई घरों में दही‑भल्ले या पकोड़े भी बनाते हैं ताकि मेहमानों को विविधता मिले। अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है तो तैयार बेक्ड चिकन या फ्रीज़र से निकाली हुई सॉसेज का उपयोग कर सकते हैं – स्वाद वही रहता है, मेहनत कम होती है।
बलि‑दान के बाद बचा हुआ मांस परिवार और पड़ोसियों में बाँटना एक सामाजिक कर्तव्य माना जाता है। अक्सर लोग इसे भेड़ की कटाई कहते हैं, लेकिन असली बात यह है कि खाना शेयर करने से सबका दिल खुश रहता है। इस साल कई ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर भी बिन‑ऑर्डर डिलीवरी सेवा शुरू हुई है, जिससे छोटे शहरों में रहने वाले लोग भी आसानी से मांस प्राप्त कर सकते हैं।
ईद के दिन नई कपड़े पहनना और बच्चों को मिठाइयाँ देना भी आम रिवाज़ है। बाजार में इस मौके पर कई ख़ास कलेक्शन आते हैं – हल्के रंग की शाल, कुर्ता‑पायजामा या लहँगा। अगर बजट कम है तो सेकेंड-हैंड स्टोर्स से भी अच्छे विकल्प मिल जाते हैं; बस साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखें।
यात्रा करने वाले लोगों को कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए: ट्रेन, एयरलाइन या बस के टिकट पहले ही बुक कर लें क्योंकि ईद के आस‑पास ट्रैफिक बहुत भारी होता है। साथ‑साथ इफ़्तार की टाइमिंग और स्थानीय मस्जिद की प्रार्थना शेड्यूल देख लेना फायदेमंद रहेगा। इससे देर नहीं होगी और आप पूरे दिन को आराम से मनाने में सक्षम रहेंगे।
आशा है कि यह छोटा गाइड आपकी ईद-उल-अज़हा को आसान, समझदार और खुशहाल बनाने में मदद करेगा। अगर आपके पास कोई नया रेसिपी या यात्रा टिप्स हैं तो हमें कमेंट सेक्शन में बताएं – हम सब मिलकर इस त्योहारी माहौल को और रंगीन बनाते हैं।
जून 16, 2024
ईद-उल-अज़हा, जिसे बकरीद के नाम से भी जाना जाता है, इस्लामिक त्यौहार है जो पूरे विश्व में उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार पैगंबर इब्राहिम की कुरबानी की कहानी की याद दिलाता है और मुस्लिम समुदाय में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देता है।
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