जब हम समाचार में "सैन्य अभ्यास" देखते हैं तो अक्सर सोचते हैं कि ये सिर्फ बड़े‑बड़े मंचों का शो है। असल में यह सैनिकों की टीम को वास्तविक जंग जैसी स्थितियों में तैयार करने का तरीका है। छोटी‑छोटी ड्रिल से लेकर कई देशों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर किए जाने वाले अभ्यास तक, हर कदम का मकसद तैनाती की तत्परता बढ़ाना और टीमवर्क सुधारना होता है।
अभ्यास दो तरह से बाँटे जा सकते हैं – देशीय (इनडोर्स) और अंतरराष्ट्रीय (जॉइंट)। इनडोर्स में भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना अपने ही मैदानों पर शत्रु के हमले की नकल करती है। जैसे कि गहरी जमीनी लड़ाई, पर्वतीय संचालन या समुद्री रक्षात्मक ड्रिल। जॉइंट अभ्यास में भारत और किसी अन्य देश के सैनिक एक साथ मिलकर ट्रेनिंग करते हैं – उदाहरण के तौर पर यू‑एस के साथ "मैनहट्टन एक्सरसाइज" या रूस के साथ "रिवालिया"। इस तरह का सहयोग दोनों पक्षों को नई तकनीक, रणनीति और कम्युनिकेशन में सुधार लाता है।
पिछले साल भारत ने कई बड़े‑बड़े अभ्यास किए। "एक्सोर्डियन 2024" में भारतीय सेना ने कश्मीर की पहाड़ी इलाकों में उच्च ऊँचाई पर ऑपरेशन का अभ्यास किया, जिससे ट्रैक्शन और लॉजिस्टिक सपोर्ट बेहतर हुआ। इसी तरह, नौसेना ने "अटलांटिस रिवालिया" के तहत अरब सागर में एंटी‑पायरेट ड्रिल किया, जहाँ समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। वायुसेना ने "विंडर स्टॉर्म" नामक अभ्यास में फाइटर जेट्स की एयर‑टू‑एयर और एअर‑टू‑ग्राउंड क्षमताओं पर काम किया। इन सभी अभियानों से सैनिकों की रीयल‑टाइम प्रतिक्रिया, उपकरणों का सही इस्तेमाल और अलग‑अलग कमांड स्ट्रक्चर के बीच तालमेल बढ़ा।
सैन्य अभ्यास सिर्फ फॉर्मेशन नहीं है; ये वास्तविक खतरे से निपटने की तैयारी को सच्ची बनाते हैं। अगर आप अपने देश की सुरक्षा में दिलचस्पी रखते हैं, तो इन अभ्यासों का अनुसरण करने से आपको पता चलेगा कि हमारी सेना कैसे आधुनिक चुनौतियों के लिए खुद को अपडेट करती रहती है।
अंत में इतना ही कहेंगे – जब भी समाचार में "सैन्य अभ्यास" आए, याद रखें कि ये हमारे सैनिकों की ताकत और तैयारी का बेजोड़ प्रमाण हैं। इस जानकारी से आप न सिर्फ घटनाओं को समझ पाएँगे बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के बड़े चित्र को भी देख सकेंगे।
मई 24, 2024
चीन ने ताइवान के समीप सैन्य अभ्यासों का दूसरा दिन प्रारंभ किया, जिसका उद्देश्य अपने सैन्य बल की क्षमता का परीक्षण करना है। ताइवान ने इसे तर्कहीन उकसावे की संज्ञा दी है और अपनी सुरक्षा के लिए सेना, नौसेना और वायुसेना को तैनात किया है।
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