क्या आपने कभी सोचा है कि समाज में सभी को बराबर अवसर मिलते हैं या नहीं? समावेशिता का मतलब सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसी सोच है जो हर वर्ग, लिंग, जाति और क्षमता वाले लोगों को साथ लेती है। जब हम अलग‑अलग पृष्ठभूमियों के लोगों को अपनाते हैं, तो न केवल सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं, बल्कि कामकाज में भी नई ऊर्जा आती है। इस लेख में हम बात करेंगे कि समावेशिता क्यों जरूरी है और इसे रोज़मर्रा की जिंदगी में कैसे लागू किया जा सकता है।
पहली बार जब आप स्कूल या ऑफिस में किसी को बाहर रखे देखते हैं, तो सोचिए कि उसका मन कैसा होगा। ऐसे अनुभव न सिर्फ व्यक्तिगत असहजता पैदा करते हैं बल्कि समूह के प्रदर्शन पर भी असर डालते हैं। समावेशिता से हर कोई खुद को मूल्यवान महसूस करता है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है और रचनात्मक विचारों का प्रवाह तेज़ होता है। आर्थिक रूप से देखिए तो विविध टीमें बेहतर निर्णय लेती हैं, क्योंकि वे कई दृष्टिकोणों को जोड़ती हैं। इस तरह सामाजिक बुराइयों को कम करने के साथ‑साथ उत्पादकता भी बढ़ती है।
समावेशिता शुरू करना मुश्किल नहीं, बस कुछ छोटे‑छोटे कदम पर्याप्त हैं। पहले तो भाषा में बदलाव लाएं: "आप" के साथ-साथ "तुम" या "वे" जैसे शब्दों का प्रयोग करके सभी को शामिल महसूस कराएँ। दूसरी बात, मीटिंग्स या कक्षा में हर व्यक्ति से राय पूछें, खासकर उनसे जो आम तौर पर चुप रह जाते हैं। यदि आप एक प्रबंधक हैं तो लचीली कार्यशैली अपनाएं—जैसे घर से काम करने का विकल्प या विशेष आवश्यकताओं वाले कर्मचारियों के लिये आसान पहुँच वाली सुविधाएँ। अंत में, विविधता को सेलिब्रेट करें; किसी उत्सव, कहानी सत्र या सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये अलग‑अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की पहचान को उजागर करें। इन साधनों से आप एक ऐसा माहौल बनाएँगे जहाँ हर कोई अपना सर्वश्रेष्ठ दे सके।
समावेशिता सिर्फ नीति नहीं, बल्कि दैनिक व्यवहार का हिस्सा है। जब हम अपने छोटे‑छोटे कामों में दूसरों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हैं, तो पूरे समाज में परिवर्तन लाने की शक्ति मिलती है। याद रखें, एकजुट और विविध समुदाय ही भविष्य में स्थायी विकास का आधार बनता है। अब समय आ गया है कि आप भी इस यात्रा में कदम रखें और अपने आसपास समावेशिता को जीवंत बनाएं।
मई 15, 2024
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी लोकसभा सीट के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। उनके साथ चार प्रस्तावक थे जो विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए समावेशिता का संदेश दे रहे थे। नामांकन के दौरान वरिष्ठ BJP नेताओं और NDA सहयोगियों की मौजूदगी भी देखी गई।
और पढ़ें