स्वतंत्रता संग्राम क्या था?

जब आप ‘स्वतंत्रता संग्राम’ सुनते हैं तो दिमाग़ में कई बड़ी‑बड़ी बातें आती होंगी – जुलूस, जेल की कहानियां और अंग्रेज़ों से लड़ाई। असल में यह एक सालों का संघर्ष था, जहाँ लाखों लोग छोटे‑छोटे कदमों से आज़ादी की राह बनाते रहे।

1800 के दशक के अंत में ब्रिटिश राज ने भारत पर कड़ा हाथ जमा लिया। तब लोगों को अपनी पहचान बचाने और अपना देश खुद चलाने की जरूरत महसूस हुई। इसी भावना ने स्वतंत्रता संग्राम को जन्म दिया।

मुख्य नेता और उनका योगदान

सबसे पहले महात्मा गांधी आए। उन्होंने अहिंसा, सत्याग्रह जैसे आसान‑सुनने वाले तरीकों से लोगों को जोड़ना शुरू किया। 1919 में जलियावाला बाग हत्याकांड के बाद उनके ‘नमक सत्याग्रह’ ने पूरे देश में आग लगाई।

बापू दादरानी, सुभाष चंद्र बोस और लाल बहादुर शास्त्री जैसे नेता भी इस आंदोलन में अहम थे। बोस ने भारत को फौज के ज़रिए आज़ाद करने की बात कही, जबकि बापू ने ग्रामीण स्तर पर किसान‑किसान का समर्थन जुटाया।

अंत में पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं ने राजनीतिक दिशा दी, जिससे 1947 में आज़ादी मिल सकी।

मुख्य घटनाएँ जो मोड़ बनीं

1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को अक्सर ‘सिपाही विद्रोह’ कहा जाता है, लेकिन यह पहली बड़ी आवाज थी कि लोग अंग्रेज़ों के खिलाफ नहीं झुकेंगे।

1919 का ‘जूलिया बाग हत्याकांड’, 1920‑22 का ‘गैर‑कोऑपरेटिव मूवमेंट’, और 1930 का ‘नमक सत्याग्रह’ ने जनता को जागरूक किया। फिर 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ ने पूरे देश को एकजुट कर दिया। इस दौरान कई नेता जेल गए, पर उनकी आवाज़ बंद नहीं हुई।

इन घटनाओं की वजह से 1947 में भारत को आज़ादी मिली, लेकिन विभाजन का दर्द भी साथ आया। फिर भी स्वतंत्रता संग्राम हमें सिखाता है कि छोटा‑छोटा कदम भी बड़ा बदलाव ला सकता है।आज जब हम स्कूल या कॉलेज में इतिहास पढ़ते हैं, तो ये कहानी सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अगर आप अपने बच्चों को या दोस्तों को समझाना चाहते हैं, तो उन्हें इन वास्तविक किस्सों से जोड़ें – जैसे गांधीजी का रथ पर चाय पीते हुए सफ़र, या बोस जी की ‘अज़र शहीद’ के सपने।

इस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम न सिर्फ इतिहास है, बल्कि आज भी प्रेरणा देता है कि हम अपनी समस्याओं को मिल‑जुल कर सुलझा सकते हैं। आप भी अपने छोटे‑छोटे काम से इस विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं – चाहे वह पर्यावरण की रक्षा हो या सामाजिक न्याय के लिए आवाज़ उठाना।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
Ranjit Sapre

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

राष्ट्रीय 0 टिप्पणि
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जनवरी, 2025 को पराक्रम दिवस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने नेताजी की अद्वितीय योगदान की सराहना की और उन्हें साहस और धैर्य का प्रतीक बताया। मोदी ने ओडिशा में हुए भव्य समारोहों की प्रशंसा की और युवाओं को नेताजी की प्रेरणा से प्रोत्साहित करने की उम्मीद जताई। आजादी की लड़ाई में नेताजी के अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया गया।

और पढ़ें