भाई लोग, टैक्स सुनते ही दिमाग में अक्सर जटिल फॉर्म या भारी जुर्माना आता है। लेकिन सच्चाई यह है कि अगर आप बुनियादी चीजें जान लें तो टैक्स आपका दुश्मन नहीं, बल्कि एक सहायक बन सकता है। यहाँ हम सरल भाषा में वो सभी बातें बताएंगे जो हर भारतीय को पता होनी चाहिए।
सबसे पहले, टैक्स दो भागों में आता है – आयकर और जीएसटी। आयकर वह हिस्सा है जो आप अपनी सालाना आय पर देते हैं, जबकि जीएसटी वस्तु‑सामान और सेवाओं पर लागू होता है। दोनों के अलग-अलग नियम होते हैं, लेकिन उनका मूल मकसद सरकार को चलाने वाला फंड जुटाना ही है।
2024‑25 वित्तीय साल में कुछ अहम बदलाव आए हैं। आयकर स्लैब में 7% की नई कटौती दी गई, जिससे मध्यम वर्ग को थोड़ा राहत मिलेगी। साथ ही, सैलरी पैनल पर अब ‘फॉर्म 16A’ भी मिल सकता है, जो टैक्स डिडक्शन का प्रूफ़ देता है। जीएसटी के तहत छोटे व्यवसायों को अब ‘ऑनलाइन रिटर्न फाइलिंग’ अनिवार्य कर दी गई है, ताकि रिकॉर्ड रख‑रखाव आसान हो सके।
यदि आप फ्रीलांस या साइड बिज़नेस चलाते हैं तो यह समझना जरूरी है कि आपके इनवॉइस में जीएसटी नंबर होना चाहिए और हर महीने रिटर्न फ़ाइल करना पड़ेगा। नहीं तो पेनाल्टी लग सकती है, जो अक्सर 10‑15% तक बढ़ जाती है।
एक और नई बात: यदि आप पहले साल के अंत में अपने टैक्स को जल्दी भरते हैं तो आपको ‘प्रारम्भिक भुगतान छूट’ मिलती है – यानी कुछ रियायतें सीधे आपकी देय राशि से कट जाएँगी। यह सुविधा केवल इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट पर लागू होती है, इसलिए नेट बैंकिंग या यूपीआई का इस्तेमाल करें।
अब बात करते हैं कुछ आसान उपायों की, जिनसे आप बिना झंझट के टैक्स बचा सकते हैं। सबसे पहले, सेक्शन 80C में निवेश करके आप अपनी आय को घटा सकते हैं – लाइफ़ इन्श्योरेंस, पब्लिक प्रोविडेंट फंड या ELSS म्यूचुअल फ़ंड्स बेहतरीन विकल्प हैं। साल भर इनमें कुल 1.5 लाख रुपए तक की कटौती मिलती है।
दूसरा टिप: हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम सेक्शन 80D में डिडक्टेबल है, चाहे वह आपके लिए हो या आपका परिवार। यह न सिर्फ स्वास्थ्य सुरक्षा देता है बल्कि टैक्स बचत भी करता है।
तीसरी बात – अगर आप घर खरीदने की सोच रहे हैं तो हाउस लोन पर मिलने वाले इंटरेस्ट को भी सेक्शन 24(b) में डिडक्ट कर सकते हैं, जिससे सालाना काफी बचत होती है। छोटे शहरों में ये कटौती अधिक लाभदायक रहती है क्योंकि प्रॉपर्टी वैल्यू कम होते हैं।
एक और ट्रिक: यदि आपका परिवार का सदस्य पढ़ाई कर रहा है तो सेक्शन 80E के तहत शिक्षा लोन पर ब्याज की पूरी राशि डिडक्ट हो सकती है, चाहे वह कितनी भी बड़ी हो। इस लाभ को न भूलें, खासकर जब आप कई सालों में कर्ज़ चुकाते हैं।
अंत में, हमेशा अपना फॉर्म 16 और इनवॉइस रखेँ। डिजिटल रिकॉर्ड रखने से रिटर्न फ़ाइल करते समय झंझट नहीं होती और ऑडिट के मौके भी कम होते हैं। अगर आप टैक्स एजेंट या सीए की मदद ले रहे हैं तो उनके पास ये दस्तावेज़ तैयार रखें, ताकि प्रक्रिया तेज़ हो सके।
तो भाई‑बहनों, टैक्स को डराने वाली चीज़ नहीं बनाइए – इसे समझिए और सही कदम उठाइए। छोटे‑छोटे बदलाव और योजनाबद्ध निवेश आपको साल के अंत में काफी बचत दिला सकते हैं। अगर कोई सवाल है तो नीचे कमेंट में लिखिए, हम मिलकर जवाब देंगे!
सितंबर 9, 2024
GST परिषद ने 2,000 रुपये से कम की लेनदेन पर 18% GST लगाने के मुद्दे को फिटमेंट समिति को सौंपा है। यह कदम छोटे ऑनलाइन भुगतान को प्रभावित कर सकता है। पहले जारी अधिसूचना के तहत, भुगतान एग्रीगेटर्स को इन लेनदेन पर टैक्स चार्ज नहीं करना होता था।
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