UP में प्रीपेड स्मार्ट मीटर की जबरदस्ती खत्म, CEA ने बदला नियम

Ranjit Sapre अप्रैल 16, 2026 समाचार 14 टिप्पणि
UP में प्रीपेड स्मार्ट मीटर की जबरदस्ती खत्म, CEA ने बदला नियम

उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। Central Electricity Authority (CEA), जिसने 1 अप्रैल 2026 को एक नया नोटिफिकेशन जारी कर स्मार्ट मीटर लगाने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब बिजली मीटर को 'प्रीपेड मोड' पर रखना अनिवार्य नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि अब उपभोक्ता अपनी मर्जी और सुविधा के हिसाब से प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुन सकते हैं। यह फैसला तब आया जब यूपी में बिना सहमति के मीटर बदलने को लेकर भारी बवाल मच गया था।

दरअसल, कहानी तब बिगड़ी जब पता चला कि उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर के नाम पर लोगों के साथ मनमानी की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के करीब 78 लाख उपभोक्ताओं के घर स्मार्ट मीटर लगाए गए थे, जिनमें से लगभग 70.50 लाख लोगों के मीटरों को उनकी जानकारी या सहमति के बिना ही जबरन प्रीपेड मोड में बदल दिया गया। सोचिए, अचानक एक सुबह आप जागें और आपको पता चले कि आपका बिजली कनेक्शन अब एक मोबाइल रिचार्ज की तरह काम कर रहा है, जबकि आपने इसकी मांग ही नहीं की थी। जाहिर है, लोग भड़के और उन्होंने बिजली विभाग के अधिशासी अभियंताओं (Executive Engineers) के दफ्तरों में पोस्टपेड मोड पर वापस लौटने के लिए आवेदनों की बाढ़ ला दी।

संसद में गूंजा मामला और मंत्री का स्पष्टीकरण

इस पूरे विवाद ने तब तूल पकड़ा जब मामला संसद पहुंचा। अप्रैल 2026 के शुरुआती दिनों में लोकसभा सत्र के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस मुद्दे पर सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने दो टूक कहा कि Electricity Act, 2003 की धारा 47(5) के तहत किसी भी स्मार्ट मीटर को उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड या पोस्टपेड मोड में नहीं बदला जा सकता।

मंत्री खट्टर ने स्पष्ट किया कि प्रीपेड और पोस्टपेड के बीच चुनाव पूरी तरह से उपभोक्ता का अधिकार है। बिजली वितरण कंपनियां (Discoms) अपनी मर्जी से इसे थोप नहीं सकतीं। कानून की बारीकियों की बात करें तो, धारा 47(5) कहती है कि अगर कोई उपभोक्ता स्वेच्छा से प्रीपेड मीटर मांगता है, तो वितरण लाइसेंसधारी को बिना किसी सुरक्षा जमा (security deposit) के यह सुविधा देनी होगी। वहीं, 'बिजली (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020' नए कनेक्शनों के लिए प्रीपेड मीटर की अनुमति देता है, लेकिन किसी भी अपवाद की स्थिति में राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC) की मंजूरी जरूरी है। सरल शब्दों में कहें तो, सरकार का लक्ष्य लोगों को प्रोत्साहित करना था, डराना या मजबूर करना नहीं। (पर ऐसा लगता है कि जमीनी स्तर पर अधिकारियों ने शॉर्टकट अपनाने की कोशिश की)।

उपभोक्ता परिषद की मांग और अधिकारियों की मुश्किल

जैसे ही मंत्री का बयान आया, उपभोक्ता संगठनों ने इसे अपनी जीत माना। अवधेश कुमार वर्मा, जो State Electricity Consumer Council के अध्यक्ष हैं, उन्होंने मांग की है कि कानून का 100 प्रतिशत पालन किया जाए। वर्मा का कहना है कि परिषद लंबे समय से चेतावनी दे रही थी कि बिना अनुमति के मीटर न बदले जाएं, लेकिन बिजली निगमों ने इसे नजरअंदाज किया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

दूसरी तरफ, यूपी के अधिशासी अभियंता अब दबाव में हैं। उनका कहना है कि पहले काम के बोझ के कारण टारगेट पूरे करने की होड़ थी, लेकिन अब जब लाखों लोग अपने मीटर वापस पोस्टपेड करवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो प्रशासनिक बोझ काफी बढ़ गया है। पहले पावर कॉर्पोरेशन्स ने प्रीपेड मीटर लागू करने के आदेश दिए थे, लेकिन अब CEA की नई गाइडलाइंस के बाद उन पुराने आदेशों की कोई कीमत नहीं रही।

नियमों में बदलाव: अब क्या होगा?

1 अप्रैल 2026 को जारी CEA के नए नोटिफिकेशन ने खेल बदल दिया है। अब नियम यह है कि स्मार्ट मीटर केवल उन्हीं जगहों पर लगाए जाएंगे जहां कम्युनिकेशन नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब प्रीपेड मोड अनिवार्य नहीं है।

मुख्य बदलाव एक नज़र में:

  • उपभोक्ता अब अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड विकल्प चुन सकते हैं।
  • बिजली विभाग अब एकतरफा तरीके से मोड नहीं बदल पाएगा।
  • सहमति के बिना प्रीपेड मोड लागू करना अब सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
  • नया सिस्टम केवल नेटवर्क उपलब्धता के आधार पर ही लागू होगा।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह घटना दिखाती है कि डिजिटल इंडिया और स्मार्ट गवर्नेंस के दौर में 'उपभोक्ता की सहमति' कितनी अहम है। 70 लाख से ज्यादा लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करना एक गंभीर प्रशासनिक चूक थी। यह मामला उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो सरकारी नियमों के प्रति जागरूक नहीं हैं। जब कानून आपकी जेब और आपकी सुविधा की बात करता है, तो उसकी जानकारी होना जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या मेरा प्रीपेड स्मार्ट मीटर अब वापस पोस्टपेड हो सकता है?

हाँ, CEA के नए नोटिफिकेशन और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के स्पष्टीकरण के बाद, यदि आपका मीटर आपकी सहमति के बिना प्रीपेड में बदला गया था, तो आप अपने स्थानीय बिजली विभाग (Executive Engineer कार्यालय) में पोस्टपेड मोड में वापस लौटने के लिए आवेदन दे सकते हैं।

बिजली अधिनियम 2003 की धारा 47(5) क्या कहती है?

यह धारा स्पष्ट करती है कि बिजली मीटर को प्रीपेड या पोस्टपेड मोड में बदलने के लिए उपभोक्ता की स्पष्ट सहमति अनिवार्य है। यदि उपभोक्ता खुद प्रीपेड मीटर मांगता है, तो कंपनी को बिना सुरक्षा राशि लिए यह सुविधा देनी होगी।

उत्तर प्रदेश में कितने उपभोक्ताओं के साथ यह समस्या हुई?

रिपोर्ट्स के अनुसार, यूपी में करीब 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए थे, जिनमें से लगभग 70.50 लाख उपभोक्ताओं के मीटरों को उनकी सहमति के बिना जबरन प्रीपेड मोड में परिवर्तित कर दिया गया था।

क्या नए कनेक्शनों के लिए भी प्रीपेड मीटर अनिवार्य है?

बिजली (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के तहत नए कनेक्शनों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर दिए जा सकते हैं, लेकिन यदि कोई उपभोक्ता इससे छूट चाहता है, तो इसके लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC) की मंजूरी आवश्यक होती है।

CEA के 1 अप्रैल 2026 के नोटिफिकेशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस नोटिफिकेशन का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को मीटर के मोड (प्रीपेड या पोस्टपेड) को चुनने की स्वायत्तता देना और वितरण कंपनियों द्वारा की जा रही मनमानी को रोकना है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना है कि मीटर केवल बेहतर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में ही लगाए जाएं।

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14 टिप्पणि

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    Anirban Das

    अप्रैल 18, 2026 AT 16:29

    सब नाटक है @_@

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    Senthilkumar Vedagiri

    अप्रैल 19, 2026 AT 14:19

    भाई ये सब तो बस दिखावा है, असली खेल तो पर्दे के पीछे चल रहा है। पहले जबरन मीटर लगा दिए ताकि डेटा चोरी कर सकें, अब जब पकड़े गए तो नियम बदल दिया। ये सब एक बड़ी साजिश का हिस्सा है, बस हमें बेवकूफ बना रहे हैं। देख लेना आगे चलकर फिर कुछ नया तरीका निकालेंगे पैसे ऐंठने का। कतई फर्जी सिस्टम है ये!

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    Arumugam kumarasamy

    अप्रैल 20, 2026 AT 08:53

    प्रशासनिक अक्षमता का यह उत्कृष्ट उदाहरण है। जब आप 70 लाख लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, तो वह केवल एक 'चूक' नहीं बल्कि एक गंभीर विफलता होती है। मुझे आश्चर्य है कि हमारे देश में नियम केवल कागजों पर क्यों रहते हैं और जमीन पर अधिकारी अपनी मनमानी करते हैं। भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए पहले अपनी नौकरशाही को जवाबदेह बनाना होगा। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उपभोक्ताओं को अपने ही हक के लिए आवेदन करना पड़ रहा है।

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    SAURABH PATHAK

    अप्रैल 22, 2026 AT 00:50

    सबको पता है कि ये अधिकारी सिर्फ अपना टारगेट पूरा करना चाहते थे। स्मार्ट मीटर का असल मकसद बिजली चोरी रोकना है, लेकिन इन्होंने तो आम जनता को ही टारगेट बना लिया। अब जब ऊपर से डंडा चला है, तो सब सीधे हो गए। ये सब सिस्टम का हिस्सा है, बस लोगों को जागरूक होना पड़ेगा वरना ये लोग हर चीज जबरदस्ती थोप देंगे।

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    Raman Deep

    अप्रैल 23, 2026 AT 00:50

    बहुत बढ़िया खबर है भाई!! 🥳 अब सबको आराम मिलेगा। बस सब लोग मिलकर अप्लाइ कर दो और अपना हक पा लो। जय हिन्द! 🇮🇳✨

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    Arun Prasath

    अप्रैल 23, 2026 AT 01:52

    यदि उपभोक्ता पोस्टपेड में वापस जाना चाहते हैं, तो उन्हें आवेदन के साथ अपने पिछले बिजली बिलों की प्रतियां संलग्न करनी चाहिए ताकि प्रक्रिया त्वरित हो सके। यह CEA का एक स्वागत योग्य कदम है जो उपभोक्ता संरक्षण को प्राथमिकता देता है। विनियामक ढांचे का पालन करना वितरण कंपनियों के लिए अनिवार्य है।

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    Mayank Rehani

    अप्रैल 24, 2026 AT 00:17

    बिल्कुल सही, जब तक हम 'डिमांड-साइड मैनेजमेंट' और 'कंज्यूमर ग्रिवेंस रिड्रेसल' जैसे मैकेनिज्म को ठीक नहीं करेंगे, तब तक ऐसी विसंगतियां आती रहेंगी। यह एक क्लासिक केस है जहां 'ऑपरेशनल एफिशिएंसी' के चक्कर में 'लीगल कंप्लायंस' को नजरअंदाज कर दिया गया।

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    Anamika Goyal

    अप्रैल 24, 2026 AT 20:15

    यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि अंततः लोगों की बात सुनी गई। कितने लोग परेशान रहे होंगे यह सोचकर कि अचानक बिजली चली जाएगी अगर रिचार्ज खत्म हुआ तो। उम्मीद है कि अब कोई भी अधिकारी अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल नहीं करेगा और सभी को उनकी पसंद का मीटर मिलेगा।

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    Priyank Prakash

    अप्रैल 26, 2026 AT 11:38

    हे भगवान! क्या ड्रामा है ये! 😱 पहले जबरन लगाया और अब कह रहे हैं कि आपकी मर्जी! मतलब हद है यार! ये बिजली विभाग वाले हमें पागल समझते हैं क्या? मेरा तो दिमाग ही खराब हो गया ये सब पढ़कर! एकदम सर्कस चल रहा है यहाँ! 🤡

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    shrishti bharuka

    अप्रैल 27, 2026 AT 22:22

    वाह, क्या गजब की व्यवस्था है! पहले गलती करो और फिर उसे सुधारने का एहसान जताओ। अधिकारियों की 'टारगेट' वाली मजबूरी सुनकर तो हंसी आ गई, जैसे वो कोई महान काम कर रहे थे। सच में, हमारी सरकार और उसके विभाग दुनिया के सबसे अनोखे तरीके से काम करते हैं। बहुत ही सराहनीय! (व्यंग्य)

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    saravanan saran

    अप्रैल 28, 2026 AT 13:57

    सब कुछ समय और धैर्य का खेल है। बदलाव हमेशा शोर के साथ आता है। डिजिटल दुनिया में हम अक्सर अपनी निजता और पसंद खो देते हैं, लेकिन यह खबर एक याद दिलाती है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। शांति बनाए रखें और नियमों का पालन करें।

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    Priya Menon

    अप्रैल 30, 2026 AT 00:21

    यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि 70 लाख लोगों के साथ ऐसा खिलवाड़ किया गया। भले ही अब नियम बदल गए हैं, लेकिन उन अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने कानून की धज्जियां उड़ाईं। केवल आवेदन लेने से समस्या हल नहीं होगी, जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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    Prathamesh Shrikhande

    अप्रैल 30, 2026 AT 01:29

    सही बात है, बहुत लोग इस वजह से तनाव में थे। अब सबको राहत मिलेगी 😇🙏

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    Robin Godden

    मई 1, 2026 AT 05:08

    यह एक बहुत ही सकारात्मक परिवर्तन है। हमें इस अवसर का उपयोग करके अपनी बिजली खपत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करना चाहिए। सभी उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार सही विकल्प चुनें और डिजिटल इंडिया के इस सफर में अपना सहयोग दें। उज्जवल भविष्य की ओर एक कदम!

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