भूस्खलन – क्या कारण है और कैसे बचें?

आपने हाल ही में कई बार मौसम विभाग से बाढ़ और भारी बारिश का अलर्ट देखा होगा, लेकिन अक्सर यही अलर्ट भूस्खलन की चेतावनी भी ले कर आता है। अगर आप यूपी, दिल्ली या पहाड़ी इलाकों में रहते हैं तो इस जानकारी को नज़रअंदाज़ मत करें – एक छोटी सी सावधानी बड़ी जिंदगियों को बचा सकती है।

भूस्खलन क्यों होते हैं? प्रमुख कारण

भूस्खलन का सबसे बड़ा दुश्मन लगातार बारिश है। जब मिट्टी में पानी भर जाता है, तो वह कमजोर हो जाती है और पहाड़ी ढलानों से नीचे गिरना शुरू कर देती है। इधर‑उधर के समाचारों में हमने देखा कि IMD ने 30 जुलाई से 4 अगस्त तक यूपी, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और बिहार में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था। इस दौरान बाढ़ के साथ ही कई क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका भी जताई गई थी।

दुर्भाग्यवश, सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि जल निकासी सिस्टम की खराबी, अति कटाव वाली भूमि, और अनियंत्रित निर्माण कार्य भी जोखिम बढ़ाते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया कि पहाड़ी क्षेत्रों में वनस्पति हटाने से मिट्टी का पकड़ कम हो जाता है, जिससे बारिश के समय ढलान अस्थिर हो जाती है।

भूस्खलन से बचने के आसान कदम

अगर आप जोखिम वाले इलाके में रहते हैं तो नीचे दिए गए टिप्स को अपनाएँ:

  • स्थानीय अलर्ट सुनें: IMD या राज्य मौसम विभाग की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या रेडियो पर अपडेट रहें।
  • बाहर निकलते समय सतर्क रहें: अगर बारिश लगातार दो‑तीन घंटे तक हो रही है तो घर से बाहर नहीं निकलना बेहतर रहेगा।
  • सुरक्षित जगह चुनें: अपने घर के आसपास की ऊँची या ढलान वाली जगहों को पहचान कर उनका उपयोग न करें। खुली जगह, जैसे स्कूल मैदान या सरकारी भवन का बेसमेंट, अस्थायी आश्रय बन सकते हैं।
  • सुरक्षा किट तैयार रखें: टॉर्च, प्राथमिक उपचार की चीज़ें, पानी और कुछ खाने‑पीने की वस्तुएँ एक बैग में रख दें। आपातकाल में ये बहुत काम आती है।
  • पड़ोसियों से संपर्क बनाएँ: अगर आपका पड़ोसी बुजुर्ग या बच्चे वाला है तो एक दूसरे को अलर्ट भेजें, साथ‑साथ मदद की व्यवस्था करें।

इन सरल उपायों से आप न केवल खुद सुरक्षित रहेंगे बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी मदद कर पाएँगे। याद रखें – बचाव में देर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि भूस्खलन अचानक और तेज़ी से हो सकता है।

भविष्य में ऐसी घटनाओं से बेहतर तैयारी के लिए स्थानीय प्रशासन की योजनाओं पर नज़र रखिए। कई बार सरकारें जल्दी चेतावनी जारी कर evacuation routes (स्थानान्तरण मार्ग) बनाती हैं, जिनका सही उपयोग करना चाहिए। अगर आप किसी स्कूल या कॉलेज के छात्र‑छात्रा हैं तो अपने संस्थान के सुरक्षा नियमों को भी ध्यान में रखें – अक्सर वे बड़े पैमाने पर ड्रिल करवाते हैं ताकि हर कोई जानता हो कि कब और कैसे सुरक्षित जगह पहुंचना है।

अंत में, अगर आप भूस्खलन से प्रभावित हुए हों या किसी ने मदद की जरूरत बताई हो तो तुरंत स्थानीय पुलिस या फायर सर्विस को कॉल करें। तेज़ प्रतिक्रिया बचाव के काम को आसान बनाती है और नुकसान कम करती है। आपका छोटा सा कदम बड़ी राहत बन सकता है।

केरल के वायनाड में विशाल भूस्खलन से 54 की मौत, सैकड़ों फंसे
Ranjit Sapre

केरल के वायनाड में विशाल भूस्खलन से 54 की मौत, सैकड़ों फंसे

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केरल के वायनाड में विशाल भूस्खलन से 54 की मौत, सैकड़ों फंसे

केरल के वायनाड जिले में मंगलवार, 30 जुलाई 2024 की सुबह विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ है। इस भूस्खलन से कम से कम 54 लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों के फंसे होने का डर है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) ने प्रभावित क्षेत्रों में बचाव के लिए फायरफोर्स और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमों को तैनात किया है।

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