जब बात आती है डोनल्ड ट्रंप, अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति जिन्होंने राजनीति को अपने तरीके से बदल दिया. ये कोई साधारण राजनेता नहीं, बल्कि एक ऐसा व्यक्ति है जिसने सोशल मीडिया को राजनीति का हथियार बना दिया, और दुनिया भर में बहसें छेड़ दीं. उनकी ट्वीट्स बाजार हिला देती थीं, उनके बयान देशों के बीच तनाव बढ़ा देते थे, और उनका चुनाव जीतना दुनिया के लिए एक झटका था।
भारत के लिए भी डोनल्ड ट्रंप का राष्ट्रपतित्व काफी महत्वपूर्ण रहा। ट्रंप प्रशासन, जिसने अमेरिका को ‘अमेरिका पहले’ के नारे के साथ दुनिया के सामने लाया ने भारत के साथ व्यापार और रक्षा समझौतों को तेजी से आगे बढ़ाया। भारत के साथ उनका व्यक्तिगत रिश्ता भी अलग था — ट्रंप ने नरेंद्र मोदी को ‘अपना दोस्त’ कहा, और दोनों ने एक साथ रैलियों में भाग लिया। यह सिर्फ फोटो नहीं, बल्कि असली साझेदारी थी। व्यापार में भी कुछ तनाव रहा, लेकिन रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ा। भारत-अमेरिका संबंध, जो पहले से अच्छे थे, उनके शासनकाल में और गहरे हो गए।
उनके चुनाव के तरीके भी अलग थे। उन्होंने राजनीति को एक रियलिटी शो बना दिया — जहां बातचीत का तरीका, शब्दों का चयन, और तार्किक बातों से ज्यादा भावनाओं पर जोर देना जीत का राज था। उनके चुनाव के बाद दुनिया भर में लोगों ने सोचा — क्या यह अमेरिका की नई दिशा है? क्या यह तरीका किसी और देश में भी काम कर सकता है? भारत में भी उनकी रणनीति पर बहुत चर्चा हुई।
अब जब वे फिर से चुनाव के लिए तैयार हैं, तो भारत के लिए यह फिर से एक महत्वपूर्ण समय है। क्या वे वही नीतियां दोहराएंगे? क्या भारत के साथ उनका रिश्ता फिर से गहरा होगा? या कोई नया दबाव आएगा? यहां आपको उनके राष्ट्रपतित्व के दौरान हुए ऐसे ही घटनाक्रम, नीतियां और भारत पर पड़े प्रभाव के बारे में अपडेट मिलेंगे — सीधे, स्पष्ट और बिना झूठे शब्दों के।
27 अगस्त, 2025 को ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाकर द्विपक्षीय संबंधों को खतरे में डाल दिया। मोदी ने रणनीतिक स्वायत्तता अपनाई, जबकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यह टूटने वाला रिश्ता शायद कभी ठीक नहीं हो पाएगा।
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