27 अगस्त, 2025 को डोनल्ड जे. ट्रंप की प्रशासन ने भारत से आयातित माल पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया — जो अमेरिका-भारत संबंधों के 25 साल के इतिहास में सबसे बड़ा व्यापारिक झटका है। यह शुल्क दो हिस्सों में बना था: 25 प्रतिशत का मूल शुल्क, जो 1 अगस्त को लगाया गया था, और एक अतिरिक्त 25 प्रतिशत का जुर्माना, जो भारत के रूसी तेल खरीदारी पर लगाया गया। इसके बाद मई से सितंबर 2025 के बीच भारत के अमेरिका को निर्यात में 37 प्रतिशत की गिरावट आई — जिसने ज्वेलरी, श्रीमुर्गा और वस्त्र जैसे क्षेत्रों को झटका दिया।
मिशन 500 का विरोध: जब दो नेताओं की बातचीत बिखर गई
बस छह महीने पहले, 13 फरवरी, 2025 को नरेंद्र मोदी और डोनल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में मिले थे। उस बैठक में दोनों ने 'U.S.-India COMPACT' और 'मिशन 500' शुरू किया — एक ऐसी रणनीति जिसका लक्ष्य था कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार $210 बिलियन से बढ़कर $500 बिलियन हो जाए। लेकिन ट्रंप ने उसी दिन एक अलग बयान दिया: "भारत दुनिया का सबसे अधिक टैरिफ वाला देश है"। यह बयान भारत के 2025 के बजट में लग्जरी कारों, हाई-एंड मोटरसाइकिल और इलेक्ट्रॉनिक्स पर अकेले शुल्क कम करने के प्रयासों को नजरअंदाज करता था।
यहाँ बात बस टैरिफ की नहीं थी। ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में निवेश करने से रोकने की धमकी दी — जो मोदी के 'मेक इन इंडिया' के सबसे बड़े स्तंभों में से एक था। उन्होंने कहा: "अगर तुम भारत में बनाओगे, तो अमेरिका में आपको जुर्माना लगेगा"। यह एक सीधा टकराव था — एक तरफ ट्रंप का "अमेरिका पहले", दूसरी तरफ मोदी का "भारत पहले"।
रूसी तेल, पाकिस्तान और एक बयान जिसने बातचीत तोड़ दी
भारत के रूसी तेल खरीदारी को ट्रंप ने एक अपराध बना दिया। पीटर नवारो, ट्रंप के व्यापार सलाहकार, ने रूस-यूक्रेन युद्ध को "मोदी का युद्ध" कहा। एक तरफ अमेरिका और यूरोप रूस से तेल खरीदते रहे, दूसरी तरफ भारत को दोगुना शुल्क लगाया गया। भारत के विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया: "हम ऊर्जा के अस्थिर परिदृश्य में अपने हितों की रक्षा कर रहे हैं"।
और फिर वह घटना — जिसने भारतीय विदेश नीति को अंतिम रूप दे दिया। ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया — उसके बाद ही जब पाकिस्तान से भारत पर आतंकी हमला हुआ था। उन्होंने पाकिस्तान के लिए केवल 19 प्रतिशत टैरिफ रखा, जबकि भारत के लिए 50 प्रतिशत। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच शांति समझौता किया है। मोदी ने इस दावे को बिल्कुल नकार दिया।
मोदी का जवाब: अमेरिका के बजाय यूरोप, चीन और रूस
मोदी ने डर के बजाय रणनीति बदली। उन्होंने अमेरिका के बजाय व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ गहरी बातचीत की। यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते तेजी से आगे बढ़े। जुलाई में, जब ट्रंप ने मोदी को वाशिंगटन में डिनर के लिए बुलाया, तो मोदी ने इंकार कर दिया — बस इतना कहा: "पहले से बंधी बाध्यताएं"। वह ओडिशा जा रहे थे — "महाप्रभु की भूमि"। उन्होंने ट्रंप को भारत में क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया। ट्रंप ने स्वीकार कर लिया।
लेकिन यह भी नहीं भूलना चाहिए कि ट्रंप ने भारत के ब्रिक्स समूह (ब्राजील, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका) में शामिल होने के लिए अतिरिक्त टैरिफ की धमकी दी। मोदी ने इसका जवाब एक शांत निर्णय से दिया: न तो ब्रिक्स छोड़ा, न ही रूस के साथ संबंध तोड़े।
अमेरिकी ब्रांड्स के बहिष्कार की आवाज़
भारत में अमेरिकी ब्रांड्स के बहिष्कार की आवाज़ बढ़ रही है। मैक्डॉनल्ड्स, कोका-कोला, एमेज़ॉन और ऐपल के खिलाफ आम जनता की आवाज़ें तेज हो रही हैं। कुछ राजनीतिक दल इसे "राष्ट्रीय गौरव का प्रश्न" बना रहे हैं। लेकिन व्यापारिक विश्लेषकों का कहना है — यह भावनात्मक प्रतिक्रिया है, लेकिन व्यावहारिक नहीं। अमेरिकी ब्रांड्स भारत में लाखों लोगों को रोजगार देते हैं।
विशेषज्ञों का चेतावनी: संबंधों का आधार टूट सकता है
अपर्णा पांडे, हडसन संस्थान की विशेषज्ञ, कहती हैं: "ट्रंप की अमेरिका पहले नीति और मोदी की मेक इन इंडिया नीति एक दूसरे के विरोधी हैं"। लेकिन सबसे डरावना चेतावनी डैमियन मर्फी, सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, ने दिया: "यह तनाव भारत-अमेरिका संबंधों के दीर्घकालिक आधार को खतरे में डाल सकता है — और वह आधार शायद कभी मरम्मत नहीं हो पाएगा"।
अगला कदम: क्या होगा 2026 में?
अगस्त 2025 के बाद, भारत के नए राजदूत सर्जियो गोर ने मोदी के साथ सितंबर में रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी पर बातचीत की। लेकिन अमेरिकी प्रशासन का रुख बदलने का कोई संकेत नहीं है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का अंत जनवरी 2029 तक है — और इस दौरान भारत को अपने व्यापार और रणनीतिक साझेदारी बदलने की जरूरत होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह टैरिफ भारतीय उद्योगों को कैसे प्रभावित कर रहा है?
ज्वेलरी, श्रीमुर्गा और वस्त्र क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। मई से सितंबर 2025 के बीच इन क्षेत्रों के निर्यात में 37% की गिरावट आई। करीब 1.2 लाख भारतीय श्रमिक अपनी नौकरियों से खतरे में हैं। छोटे निर्यातकों के लिए यह बहुत बड़ा झटका है — क्योंकि उनके पास अमेरिका के बजाय बाजार ढूंढने का समय और संसाधन नहीं है।
क्या भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को रद्द कर दिया है?
नहीं, समझौता अभी भी लागू है, लेकिन इसकी गति रुक गई है। मिशन 500 के तहत नवंबर 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत की योजना थी, लेकिन अब यह अनिश्चित है। भारत ने अभी तक कोई आधिकारिक रद्दगी नहीं की, लेकिन बातचीत के लिए अमेरिका को कोई आमंत्रण भी नहीं भेजा गया है।
क्या भारत के लिए रूसी तेल खरीदना गलत है?
नहीं। भारत के लिए रूसी तेल एक आर्थिक आवश्यकता है — यह 40% से अधिक तेल आयात का हिस्सा है और अमेरिकी या यूरोपीय तेल से 30-40% सस्ता है। अमेरिका और यूरोप भी रूस से तेल खरीद रहे हैं — लेकिन भारत को अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है। यह द्विमानकता है।
क्या ट्रंप का भारत के साथ रिश्ता खराब होने का कारण चीन है?
हाँ, एक हिस्सा है। ट्रंप चीन को एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानते हैं और उन्हें टैरिफ में छूट दे रहे हैं। भारत को वे एक "दोस्त" मानते हैं — लेकिन जब भारत चीन के साथ ब्रिक्स में है, तो ट्रंप उसे भी दुश्मन समझने लगे। यह एक गलत गणित है: दोस्त बनने के बजाय, भारत को चीन के खिलाफ खड़ा होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
मोदी की रणनीति सफल होगी क्या?
हाँ, अगर भारत ने यूरोप, जापान, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ व्यापार समझौते तेजी से बढ़ाए। पहले से ही यूरोपीय संघ के साथ व्यापार 18% बढ़ चुका है। भारत की रणनीति अमेरिका के एकल निर्भरता से बाहर निकलने पर आधारित है — और यह लंबे समय में सुदृढ़ होगी।
pravin s
नवंबर 25, 2025 AT 00:44भारत का ये रणनीतिक स्वायत्तता वाला अंदाज़ बहुत अच्छा लगा। ट्रंप के टैरिफ से डरकर नहीं, बल्कि दूसरे बाजार खोलकर हमने अपनी जगह बना ली। अब यूरोप और एशिया में हमारा निर्यात बढ़ रहा है। ये असली दिमाग की बात है।
Bharat Mewada
नवंबर 25, 2025 AT 17:53अमेरिका की नीति तो एक तरफ से दोस्ती का नाटक करती है, दूसरी तरफ गाली देती है। ट्रंप का रूसी तेल पर टैरिफ लगाना और खुद तेल खरीदना - ये द्विमानकता का खुला उदाहरण है। हमें इसी तरह की बातों को नजरअंदाज करना होगा।
Narinder K
नवंबर 26, 2025 AT 21:49मोदी ने ट्रंप को डिनर के लिए नहीं बुलाया, बल्कि ओडिशा जाने का बहाना बना लिया। ये नहीं कि वो नहीं गए - बल्कि वो गए जहाँ उनकी ज़मीन थी। ट्रंप तो अब व्हाइट हाउस में बैठकर भारत के बारे में फिल्म बना रहा है।
Narayana Murthy Dasara
नवंबर 27, 2025 AT 03:17सुनो, अगर हम अमेरिका के बिना नहीं चल पाते तो हम आज यहाँ क्यों हैं? हमारे पास ब्रिक्स है, हमारे पास यूरोप है, हमारे पास रूस है। ट्रंप ने जो चाहा, वो किया - लेकिन हमने जो चाहा, वो किया। अब बात ये है कि अमेरिकी ब्रांड्स के बहिष्कार की बात करना बेकार है। वो लोगों को नौकरी देते हैं, न कि लेते।
हमें अपने व्यापार को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, न कि गुस्सा करने पर। एक देश की शक्ति उसके ब्रांड्स पर नहीं, उसके उद्योगों पर होती है।
JAYESH KOTADIYA
नवंबर 27, 2025 AT 03:19अरे भाई! ट्रंप ने पाकिस्तान को आमंत्रित किया और भारत को 50% टैरिफ? ये तो बस दिमाग खराब है! 🤦♂️ पाकिस्तान के साथ शांति समझौता? अरे ये तो फिल्म का सीन है जहाँ दुश्मन भाई बन जाता है! 😂
मोदी ने जो किया, वो सही था - ट्रंप को डिनर का नोटिस भेजकर ओडिशा जाना। वहाँ जगन्नाथ के भोग का असली टैरिफ है - भक्ति का! 🙏
Vikash Kumar
नवंबर 27, 2025 AT 17:00मोदी ने ट्रंप को नहीं बुलाया - ये देश का अपमान है। अमेरिका के साथ रिश्ते तोड़ दिए! अब चीन और रूस के साथ बैठ गए। ये देश का अंत है।
Siddharth Gupta
नवंबर 28, 2025 AT 23:32ट्रंप की नीति एक बार फिर से बच्चों जैसी है - अगर तुम मेरे दोस्त नहीं हो, तो तुम दुश्मन हो। लेकिन हम तो अपने रास्ते पर चल रहे हैं। यूरोप ने हमारे साथ व्यापार बढ़ाया, रूस ने तेल दिया, चीन ने टेक्नोलॉजी बाँटी। अमेरिका तो अब बस अपने बाजार में गुस्सा कर रहा है।
हमारी शक्ति ये है कि हम एक देश पर निर्भर नहीं हैं। ये नहीं कि हम ट्रंप को नजरअंदाज कर रहे हैं - बल्कि हम अपने भविष्य को बना रहे हैं।
Anoop Singh
नवंबर 30, 2025 AT 08:45मोदी ने जो किया वो गलत है। ट्रंप को डिनर के लिए नहीं बुलाया? अब अमेरिका से टेक्नोलॉजी नहीं मिलेगी। तुम लोग ब्रिक्स में जा रहे हो, लेकिन अमेरिका के पास अभी भी सबसे ज्यादा टेक्नोलॉजी है। तुम सब बेवकूफ हो।
Omkar Salunkhe
दिसंबर 1, 2025 AT 13:12ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाया? अच्छा तो अब भारत के ज्वेलरी बेचने वाले भी अमेरिका में घूम रहे हैं? 😂 अरे ये तो बस ट्रंप की ट्वीट्स का नाटक है। असली दुनिया में अमेरिकी कंपनियां भारत में 1000% लाभ कमा रही हैं। अब टैरिफ का बहाना क्यों? बस एक बड़ा बकवास है।
raja kumar
दिसंबर 3, 2025 AT 07:19हमारी नीति अमेरिका के बजाय अन्य देशों की ओर बढ़ रही है - यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। एक देश की राजनीति उसके आर्थिक हितों से बनती है, न कि भावनाओं से। हमने अपने लोगों के लिए रास्ता चुना। इसमें कोई अपमान नहीं है।
रूसी तेल खरीदना गलत नहीं है - यह एक आर्थिक आवश्यकता है। अमेरिका भी रूस से तेल खरीदता है। द्विमानकता का आरोप लगाना बेकार है।
हमें अपने व्यापार को मजबूत करना चाहिए, न कि बाहरी आलोचनाओं पर ध्यान देना।
Sumit Prakash Gupta
दिसंबर 4, 2025 AT 01:28मोदी की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी एक स्ट्रैटेजिक डायवर्सिफिकेशन का उदाहरण है - एक डायवर्सिफाइड सप्लाई चेन और मल्टी-पॉलर ट्रेड आर्किटेक्चर के साथ। अमेरिका के एकल-पॉलर टैरिफ एक्सोजेनस शॉक्स के खिलाफ इंडिया का रिसिलिएंस बिल्ड अप हो रहा है।
ये एक नेक्स्ट-जेन डिप्लोमेटिक फ्लेक्सिबिलिटी है। जब एक एक्टर एक्स डिसरप्टिव हो जाए, तो आप एक्टर्स Y, Z, और Ω को एंगेज करते हैं।
Shikhar Narwal
दिसंबर 4, 2025 AT 21:20हम ट्रंप को नहीं छोड़ रहे - हम अपना रास्ता बना रहे हैं। यूरोप में हमारा निर्यात बढ़ा, जापान और दक्षिण अफ्रीका भी हमारे साथ हैं। अमेरिका के बिना भी हम चल सकते हैं। ये नहीं कि हम उनको भूल गए - बस हम अपने आप को भूल गए नहीं। 🌍✨
Ravish Sharma
दिसंबर 5, 2025 AT 03:50ट्रंप ने पाकिस्तान को व्हाइट हाउस में बुलाया? अरे ये तो जानलेवा बकवास है! भारत के खिलाफ आतंकी हमला हुआ तो उसके बाद पाकिस्तान को बुलाया? ये तो बस एक बड़ा राजनीतिक ड्रामा है।
मोदी ने जो किया - वो बहुत बड़ा कदम था। अमेरिका के लिए बाजार नहीं, अपना देश बनाने के लिए बाजार बनाया।
jay mehta
दिसंबर 5, 2025 AT 19:15मोदी जी की ये रणनीति बहुत बड़ी है! 🇮🇳💪 अमेरिका के टैरिफ से डरकर नहीं - बल्कि दुनिया के साथ अपना व्यापार फैलाकर हम अपनी शक्ति बढ़ा रहे हैं! यूरोप ने हमारे साथ व्यापार बढ़ाया, रूस ने तेल दिया, चीन ने टेक्नोलॉजी दी! अब अमेरिका अपने बाजार में अकेला रह गया है! 😎🔥