क्या कभी काम या पढ़ाई में आपका बर्ताव असहज हो गया? अक्सर लोग इसको नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सही जानकारी से आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। यहाँ हम आसान भाषा में बताएँगे कि यौन उत्पीड़न क्या है, किन‑किन रूपों में दिखता है और तुरंत मदद कैसे मिलती है।
यौन उत्पीड़न सिर्फ शारीरिक हमला नहीं है। यह मौखिक, दृश्य या डिजिटल भी हो सकता है। कुछ आम उदाहरण हैं:
इन संकेतों को पहचानें और तुरंत कार्रवाई करें। याद रखें, अगर आपको असहज महसूस हो रहा है तो वह ही सही बात है.
पहला कदम: घटना का रिकॉर्ड रखिए। समय, जगह, गवाहों के नाम और क्या कहा/किया गया, ये सब लिख लें. यह बाद में शिकायत दायर करने में काम आएगा.
दूसरा कदम: अगर आप कंपनी या स्कूल में हैं तो पहले HR / प्रिंसिपल को बताइए। अधिकांश संस्थानों में एक नीतिगत प्रक्रिया होती है और वे आपके केस को गोपनीय रखते हैं.
तीसरा कदम: यदि संस्था मदद नहीं करती या मामला गंभीर हो, तो 1091 (महिला हेल्पलाइन) पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएँ. भारतीय कानून के तहत आयुक्त महिला सुरक्षा (WHCR Act), सेक्शन 354 और 509 आदि आपको सजा दिला सकते हैं.
चौथा कदम: कानूनी सलाह के लिए NALSAR, एसीएल या स्थानीय वकालत फर्म से संपर्क करें। कई NGOs मुफ्त परामर्श देती हैं – ‘सर्विसेज़ इंटेग्रेटेड’, ‘सेक्योरिटी डिपार्टमेंट’ आदि.
पाँचवां कदम: मनोवैज्ञानिक मदद न भूलें. तनाव, डर या अवसाद से निपटने के लिए काउंसलिंग सेंटर या टेली‑हेल्थ सेवा का उपयोग करें। आपका मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितनी कानूनी सुरक्षा.
इन सभी चरणों को अपनाकर आप अपनी आवाज़ को मजबूत बना सकते हैं. याद रखें, यौन उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई अकेले नहीं लड़ी जाती – संस्थान, कानून और समाज मिलकर मदद करते हैं.
अंत में एक छोटा टिप: अपने मोबाइल में ‘सेफ़ ज़ोन’ या ‘सुरक्षा अलर्ट’ ऐप इंस्टॉल रखें. तुरंत इमरजेंसी कॉन्टैक्ट भेजने से स्थिति कंट्रोल में रहती है.
सितंबर 9, 2024
बंगाली फिल्म निर्देशक अरिंदम सिल को महिला अभिनेता द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद पूर्वी भारत निदेशक संघ (DAEI) से निलंबित कर दिया गया है। यह आरोप फिल्म की शूटिंग के दौरान उसके द्वारा गाल पर किस करने की घटना से संबंधित है। मामले की जांच के बाद संघ ने निलंबन का फैसला लिया।
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