क्या आप कभी सोचे हैं कि हमारे देश के सबसे बड़े संग्रहालयों में कौन‑सी कहानियाँ छुपी हैं? अगर हाँ, तो यह पेज आपके लिये है। यहाँ हम आसान भाषा में बतायेंगे कि राष्ट्रीय संग्रहालय क्या दिखाते हैं, क्यों जाना चाहिए और कैसे आपका विज़िट यादगार बन सकता है।
राष्ट्रीय संग्रहालय सिर्फ पुख्ता वस्तुएँ नहीं रखते। आपको प्राचीन शिल्प, युद्ध की तलवारें, राजा‑रानी के पोशाक और आधुनिक कला तक सब कुछ दिखता है। हर कक्ष एक कहानी कहता है – चाहे वह सिंधु घाटी की मिट्टी की बर्तन हों या स्वतंत्रता संग्राम के दस्तावेज़। इन वस्तुओं को देखकर आप इतिहास को जीवंत महसूस करेंगे, जैसे कि टाइम‑मशीन में यात्रा कर रहे हों।
ज्यादातर संग्रहालयों में इंटरएक्टिव डिस्प्ले भी होते हैं। बच्चों को स्पर्श‑सत्र मिलते हैं जहाँ वे प्राचीन सिक्के या पाषाण युग के औजार हाथ से देख सकते हैं। ये अनुभव सीखने को मज़ेदार बनाते हैं और हर उम्र के लोगों को आकर्षित करते हैं।
पहले तय कर लें कि कौन‑सा संग्रहालय आपके रुचि से मेल खाता है – इतिहास, कला या विज्ञान? दिल्ली का राष्ट्रीय संग्रहालय, मुंबई का प्रिंस ऑफ़ वेल्स म्यूज़ियम और कोलकाता का इंडियन म्यूजियम सबसे लोकप्रिय हैं। ऑनलाइन टिकट बुक करने से लाइन में इंतजार कम होगा और आप जल्दी अंदर जा सकते हैं।
आगे की योजना बनाते समय संग्रहालय के खुलने‑बंद होने का समय, मुफ्त गाइडेड टूर और विशेष प्रदर्शनी को देख लें। कई बार वीकेंड पर बच्चों के लिये कार्यशालाएँ होती हैं, जहाँ पेंटिंग या मिट्टी की कला सीख सकते हैं। यदि आप फोटोग्राफी पसंद करते हैं तो फ्लैश‑फ्री ज़ोन का ध्यान रखें – कुछ हॉल में कैमरा नहीं ले जा सकता।
ख़ास बात यह है कि अधिकांश राष्ट्रीय संग्रहालय प्रवेश शुल्क बहुत कम रखते हैं या पूरी तरह मुफ्त होते हैं। इसलिए बजट की चिंता किए बिना आप अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं। अगर आप छात्र या वरिष्ठ नागरिक हैं तो अतिरिक्त छूट भी मिलती है, इसे वेबसाइट पर चेक करना न भूलें।
भोजन की बात करें तो संग्रहालय के अंदर अक्सर छोटे कैफ़े होते हैं जहाँ हल्का स्नैक और ठंडा पेय मिलता है। बाहर के स्थानीय स्टॉल में स्वादिष्ट भारतीय भोजन का आनंद ले सकते हैं – यह आपके दिन को और भी मज़ेदार बनाता है।
एक बार जब आप संग्रहालय की मुख्य हॉल से निकलें, तो अक्सर पास में ही स्मृति‑चिह्न शॉप होती है। यहाँ आपको छोटे मॉडल, पोस्टर या पुस्तक मिल सकती है जो आपकी यात्रा को यादगार बना देगी। कुछ संग्रहालय विशेष रूप से बच्चों के लिये खेल‑केंद्र भी रखते हैं, जहाँ वे इतिहास को गेम की मदद से सीखते हैं।
समाप्त करने से पहले एक बात और – कई राष्ट्रीय संग्रहालय नियमित रूप से नई प्रदर्शनी लगाते हैं। इसलिए अगर आप पिछले साल गए थे, तो इस बार कुछ नया देख सकते हैं। सोशल मीडिया या आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट चेक करना फायदेमंद रहेगा।
सारांश में कहें तो राष्ट्रीय संग्रहालय सिर्फ देखने की जगह नहीं, बल्कि सीखने, समझने और अनुभव करने का मंच है। चाहे आप इतिहास के शौकीन हों या कला प्रेमी, यहाँ हर किसी को कुछ न कुछ नया मिलेगा। अगली बार जब भी टाइम‑पास चाहिए, इन धरोहरों के पास जरूर जाएँ – आपका दिन निश्चित ही रंगीन हो जाएगा।
जनवरी 30, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट पर महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर राष्ट्रीय शहीद दिवस मनाया जाता है, और इस मौके पर राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है।
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