जब भारत ने रूस से तेल खरीदना शुरू किया, तो यह सिर्फ एक व्यापारिक फैसला नहीं था — यह एक रूसी तेल, रूस द्वारा उत्पादित और निर्यात किया जाने वाला कच्चा तेल, जो भारत के ऊर्जा संकट को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है के जरिए दुनिया के ऊर्जा संतुलन को बदलने का एक चाल था। अमेरिका और यूरोप के बहिष्कार के बावजूद, रूसी तेल भारत के लिए सबसे सस्ता और सबसे उपलब्ध विकल्प बन गया। इसकी कीमतें दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में 30-40% तक कम हैं, जिससे भारत ने अपनी तेल आयात का लगभग 25% हिस्सा रूस से खरीदना शुरू कर दिया।
यह बदलाव सिर्फ तेल की बात नहीं है। रूस-भारत ऊर्जा सहयोग, दोनों देशों के बीच ऊर्जा आपूर्ति, रिफाइनिंग और भुगतान प्रणाली पर आधारित साझेदारी, जो डॉलर के बजाय रुपये-रूबल में होती है ने भारत को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से अलग होने का एक रास्ता दिया। अब भारत रूस से तेल खरीदता है, और रूस भारत से चाय, दवाएं और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदता है — बिना किसी डॉलर के बीच में आए। यही कारण है कि रूसी तेल की आयात भारत के व्यापार घाटे को कम करने में मदद कर रही है।
इसका असर सीधे आपकी जेब पर पड़ता है। तेल की कीमतें, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत, जो ईंधन, प्लास्टिक और बिजली की कीमतों को निर्धारित करती है भारत में डीजल, पेट्रोल और LPG की कीमतों को नियंत्रित करती हैं। जब रूसी तेल की आपूर्ति बढ़ती है, तो भारत को विश्व बाजार की उच्च कीमतों से बचने का मौका मिलता है। यही कारण है कि आपका ऑटो रिक्शा या घरेलू गैस सिलेंडर सस्ता रहता है।
और यह सिर्फ ऊर्जा की बात नहीं। ऊर्जा सुरक्षा, किसी देश की ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता और विविधता, जो आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता से बचाव के लिए जरूरी है का मतलब है कि भारत अब केवल मध्य पूर्व या अमेरिका पर निर्भर नहीं है। रूस के साथ इस साझेदारी ने भारत को एक नया विकल्प दिया है — जो उसे अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखने में मदद कर रहा है।
इस टैग पर आपको ऐसे ही बहुत सारे तथ्य मिलेंगे — जहां रूसी तेल के बारे में खबरें, उसके भारत पर प्रभाव, और इसकी वैश्विक राजनीति से जुड़े विश्लेषण मौजूद हैं। ये खबरें सिर्फ बाजार की बात नहीं करतीं, बल्कि आपके रोज के जीवन को कैसे छूती हैं, वह भी बताती हैं।
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